आंगन में आम का पेड़ चारों ओर फैला था. गरमी के इस मौसम में खटिया डाल कर इस के नीचे बैठने का आनंद ही असीम होता है. पेड़ पर बड़ीबड़ी कैरियां लटकी हुई हों और डालियों पर कोयल कूक रही हो.

मैं अकसर दोपहर में इस के नीचे ही बैठना पसंद करती हूं. यह पेड़ बाहर सड़क से भी दिखलाई देता है. आनेजाने वाले कई राहगीर उस पर लटकती बड़ीबड़ी कैरियों को ऐसे निहारते हैं मानो आंखों से ही खा जाएंगे. पिछले दिनों मैं बैठी थी कि एक राहगीर अपनी पुत्री को साइकिल पर लिए जा रहा था. उस लड़की ने कैरियों को लटकते हुए देखा तो मचल पड़ी. ‘मैं अपने हाथ से एक फल तोड़ूंगी,’ कह कर वह वहीं लोटपोट होने को तैयार.

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