Bihu Attack Movie Review : नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने 9 दिसंबर, 2018 को भारत की संसद में पेश किया था. यह विधेयक असम के राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर से 19 लाख लोगों (मुख्यतया हिंदू और मुसलिम) को बाहर किए जाने के विरोध में लाया गया था. यह विधेयक पारित हो चुका है. इस अधिनियम के पारित होने से भारत में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए.
असम में तो आएदिन विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं. कभी सीएए विरोधी रैली में लाखों लोग इकट्ठा होते हैं. कभी पुलिस गरीब, निर्दोष लोगों पर गलत आरोप लगा कर उन्हें गिरफ्तार कर लेती है. सीएए विरोध प्रदर्शन जारी रहने के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपना असम का दौरा रद्द कर दिया था. दूसरी ओर डिब्रूगढ़, गुवाहाटी और असम के अन्य हिस्सों में हजारों लोग सीएए विरोधी प्रदर्शनों में शामिल हुए. देशभर में सीएए विरोध प्रदर्शन अरसे तक होते रहे हैं.
‘बिहू अटैक’ सरकार द्वारा प्रायोजित एक प्रोपेगंडा फिल्म है. चूंकि बिहू नृत्य असम का प्रमुख नृत्य है, इसीलिए इस का शीर्षक ‘बिहू अटैक’ रखा गया है. यह एक ऐक्शन थ्रिलर फिल्म है जिस में असम के एक कोर्ट मार्शल झेल चुके राजकुंवर (देव मेनारिया) को बिहू उत्सव पर हमले की योजना बना रहे आदिवासी समूहों पर हमला करते दिखाया गया है.
इस फिल्म में एक साहसी कोर्ट मार्शल आतंकवादियों को मुख्यधारा में समाज में शामिल होने के लिए मनाने की कोशिश करता है और रक्षा मंत्री की यात्रा के दौरान असम के एक प्रमुख सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘बिहू उत्सव’ पर हमला करने की योना बना रहे आतंकवादियों का सामना करता है. फिल्म में देशभक्ति और एकता की कहानी के लिए बिहू त्योहार को पृष्ठभूमि के रूप में इस्तेमाल किया गया है.
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