नेहा घबराई हुई थी, सागर की रिपोर्ट्स जो आनी थीं आज. नेहा ने सोते हुए सागर के चेहरे पर नजर डाली, क्या हुआ है सागर को, कितना कमजोर होता चला जा रहा है. फिर वह मुंबई के मुलुंड इलाके में तीसरे फ्लोर पर स्थित अपने फ्लैट की बालकनी में आ खड़ी हुई. यहां से उसे सोसाइटी का मेनगेट दिखाई पड़ता है. उस ने दूर से ही देख लिया कि रिया अपनी स्कूटी से आ रही है. उस का मन और बु झ गया.

यह रिया भी उसे चैन से नहीं जीने दे रही है. सागर के बचपन की इस दोस्त पर उसे बहुत गुस्सा आता है. कभी कुछ कह नहीं पाती. सोचती है, कह दिया तो सागर की नजरों में गिर जाएगी. पर कभी वह सागर और रिया की दोस्ती पर शक करती, कभी जासूसी करती, कभी उन के हावभाव देखती.

सागर को नेहा के मातापिता ने पसंद किया था. सागर का स्वभाव, व्यवहार देख कर नेहा को अपने पर गर्व ही हुआ था. वह सागर के साथ अपने वैवाहिक जीवन में पूरी तरह सुखी और संतुष्ट थी.

अब नेहा के मातापिता नहीं रहे थे. बहनभाई कोई था नहीं. सागर के भी मातापिता का सालों पहले देहांत हो चुका था. एक बड़ा भाई था, जो अपने परिवार के साथ अमेरिका में ही बस गया था. विवाह के बाद ही सागर का ट्रांसफर दिल्ली से मुंबई हो गया था. और एक दिन यहां उसे अचानक एक मौल में रिया मिल गई थी. सागर जबरदस्ती रिया को साथ घर ले कर आया था. फिर तो दोनों की बातें खत्म ही नहीं हुई थीं.

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