‘आजकल धरम तो रहा ही नहीं. जातबिरादरी जैसी बातें भी भूल गए. अब क्या बिना नहाएधोए नौकर चौके में घुसेंगे?’

इस पर विभू का स्वर ऊंचा हो गया था, ‘अम्मां, दोनों भाभियां मुझ से उम्र में बड़ी हैं, इसलिए उन के बारे में कुछ नहीं कहता पर मीता तो थोड़ाबहुत घरगृहस्थी के कामों में हाथ बंटा सकती है. कभी आप ने सोचा है, आप के लाड़- प्यार से वह कितनी बिगड़ती जा रही है. इसे भी तो दूसरे घर जाना है. क्या यह ठीक है कि घर की सभी औरतें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहें और बेचारी नीरा ही घर के कामों में जुटी रहे?’

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