Editorial : जब भी कहीं किसी शहर या कसबे में धार्मिक या जातीय दंगे होते हैं, बहुत से लोग, जो अल्पसंख्यक होते हैं और बहुसंख्यकों के बीच काफी समय से रह रहे होते हैं, घबरा कर घर बदलने की कोशिश करने लगते हैं. आमतौर पर ये हिंदुओं के बीच रह रहे होते हैं, ऐसा मुसलिमों के साथ होता है. कभीकभार मुसलिमों के बीच लंबे समय से रहते हिंदुओं के साथ भी ऐसा होता है.
अब राज्य सरकारों ने इस असुरक्षा के कारण पलायन की जिम्मेदारी अपने पर न लेते हुए रहने वालों पर ही डालनी शुरू कर दी है. कई राज्यों ने कानून बना दिए हैं जिन में डिस्टर्ब्द इलाकों को छोडऩे वालों द्वारा संपत्ति बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. राजस्थान एक कानून बना रहा है भारीभरकम नाम वाला. ‘द राजस्थान प्रोहिबिशन औफ ट्रांसफर औफ इम्मूवेबल प्रौपर्टी एंड प्रोटैक्शन औफ टिनैंट्स फ्रौम इविक्शन फ्रौम प्रीमिसिस इन डिस्टर्ब्द एरिया कानून 2026’ नाम का कानून पीडि़तों को सुरक्षा देने के लिए बनाया जा रहा है या उन्हें जबरन अपने से नाराज लोगों के बीच नारों, पत्थरों की बरसातों, छेड़छाड़ को सहते रहने लिए बनाया जा रहा है.
यह कानून कैसे इलाका छोडऩे वालों को सुरक्षा देगा, समझ से परे है. लोग घबरा कर सस्ते में संपत्ति न बेचें, इस पर सरकार बजाय उन्हें विवादास्पद इलाकों में सुरक्षा देने के उन्हें वहीं रहने व गुस्सैल भीड़ का सामना करते रहने को मजबूर कर रही है.
इस कानून के अंतर्गत जब भी कोई इलाका संवेदनशील घोषित कर दिया जाएगा, वहां की संपत्तियों का लेनदेन बंद हो जाएगा. यह तो उन इलाकों के लोगों को उन्हीं इलाकों में रहने को मजबूर करना है, उन का बचाव नहीं करना है. गुजरात में ऐसा कानून है और इस का जम कर दुरुपयोग हो रहा है क्योंकि जिला आयुक्त संपत्ति को बेचने की अनुमति दे सकता है. भीड़ का गैंग लीडर अपने शिकार की संपत्ति इस कानून के अंतर्गत आयुक्त पर दबाव डाल कर मनमाने दामों में खरीद सकता है.
आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें
डिजिटल
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन
सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं
- सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
- देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
- 7000 से ज्यादा कहानियां
- समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
- 24 प्रिंट मैगजीन





