शिखा ने बचपन से जो उपेक्षा झेली थी, उसे वह भूल नहीं सकती थी. लेकिन, इसी उपेक्षा ने उसे ऐसी हिम्मत दी थी कि वह ऐसा निर्णय ले सकी, जिस ने सब के मुंह पर ताले जड़ दिए.
'सरिता' पर आप पढ़ सकते हैं 10 आर्टिकल बिलकुल फ्री , अनलिमिटेड पढ़ने के लिए Subscribe Now