शिखा ने बचपन से जो उपेक्षा झेली थी, उसे वह भूल नहीं सकती थी. लेकिन, इसी उपेक्षा ने उसे ऐसी हिम्मत दी थी कि वह ऐसा निर्णय ले सकी, जिस ने सब के मुंह पर ताले जड़ दिए.
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