पहले तो सुरेश यही सोचता था कि घर वापस आने के बाद वह उस घटना को भूल जाएगा मगर ऐसा नहीं हो सका था. अपने में आए इस बदलाव पर खुद सुरेश का भी वश नहीं रहा था. एक छोटी सी घटना भी इनसान के जीवन को कैसे बदल सकती है, इस को वह अब महसूस कर रहा था. सुरेश अपनी ही सोच का कैदी हो अपने ही घर में, अपनों के बीच बेगाना और अजनबी बन गया था.

Tags:
COMMENT