नेहा को अस्पताल में भरती हुए 3 दिन हो चुके थे. वह घर जाने के लिए परेशान थी. बारबार वह मम्मीपापा से एक ही सवाल पूछ रही थी, ‘‘डाक्टर अंकल मुझे कब डिस्चार्ज करेंगे? मेरी पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. 15 सितंबर से मेरे इंटरनल शुरू हो जाएंगे. अभी मैं ने तैयारी भी नहीं की है. अस्पताल में भरती होने की वजह से मैं पूजा के साथ खेल भी नहीं पा रही हूं. मेरा मन उस के साथ खेलने को कर रहा है. यहां मुझे जरा भी अच्छा नहीं लगता, इसलिए मुझे जल्दी से घर ले चलो.’’

नेहा की इन बातों का कोई जवाब उस के मम्मीपापा के पास नहीं था. मम्मीपापा को चुप देख कर उस ने पूछा, ‘‘मम्मी पूजा आ गई क्या?’’

‘‘नहीं बेटा, अभी तो 7 बजने में 10 मिनट बाकी हैं, वह तो 7 बजे के बाद आती है. आप आराम से नाश्ता कर लीजिए.’’

‘‘जी मम्मी.’’ नेहा ने बडे़ ही इत्मीनान से कहा.

नेहा इंदौर में जीजीआईसी में 6वीं में पढ़ती थी. वह अपनी सहेली पूजा के साथ स्कूल जाती थी. पूजा उस के पड़ोस में ही रहती थी. दोनों में गहरी दोस्ती थी. कभी नेहा पूजा के घर जा कर होमवर्क करती तो कभी पूजा उस के घर आ जाती. होमवर्क के बाद दोनों साथसाथ खेलतीं.

उस दिन जब हिंदी के टीचर विनोद प्रसाद पढ़ा रहे थे तो उन की नजर नेहा पर चली गई. वह चुपचाप सिर झुकाए बैठी थी. उन्हें लगा कि नेहा को कोई परेशानी है तो उन्होंने पूछा, ‘‘क्या बात है नेहा?’’

विनोद प्रसाद के इस सवाल पर नेहा चौंकी. उस ने धीरे से कहा, ‘‘कुछ नहीं सर, थोड़ा पेट में दर्द है.’’

‘‘नेहा बेटा… आप को पहले बताना चाहिए था. अभी आप के लिए औफिस से दवा मंगवाता हूं.’’

विनोद प्रसाद ने औफिस से दवा मंगा कर खिलाई तो नेहा को थोड़ा आराम मिल गया. दोपहर एक बजे छुट्टी हुई तो वह पूजा के साथ घर आ गई. घर आ कर उस ने स्कूल बैग एक ओर फेंका और सोफे पर लेट गई. उस की मम्मी राधिका ने उस के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटा, कपड़े बदल कर हाथमुंह धो लो, उस के बाद खाना खा कर आराम कर लेना.’’

‘‘मुझे भूख नहीं है मम्मी. अभी कुछ भी खाने का मन नहीं हो रहा है.’’ नेहा ने कहा.

‘‘बेटा, थोड़ा ही खा लो. आज मैं ने आप की पसंद का खाना बनाया है.’’

‘‘कहा न मम्मी मुझे भूख नहीं है, प्लीज मम्मी जिद मत कीजिए. मेरे पेट में दर्द हो रहा है, इसलिए खाने का मन नहीं हो रहा है.’’

‘‘बेटा, जब आप के पेट में दर्द हो रहा है तो आप को स्कूल नहीं जाना चाहिए था. पापा आते ही होंगे, उन से आप के लिए दवा मंगवाती हूं.’’

‘‘मम्मी, स्कूल में विनोद सर ने दवा दी थी. दवा खाने के बाद थोड़ा आराम मिल गया था. लेकिन अभी फिर दर्द होने लगा है. मम्मी मेरे पेट में कई दिनों से इसी तरह रुकरुक कर दर्द हो रहा है. कभी हल्का दर्द होता है तो कभी अचानक बहुत तेज दर्द होने लगता है.’’ नेहा ने पेट दबा कर कहा.

नेहा अपनी बात कह ही रही थी कि उस के पापा राकेश उस के पास आ कर खड़े हो गए, ‘‘हैलो नेहा बेटा, मेरी बच्ची कैसी है?’’

‘‘लो पापा का नाम लिया और वह आ गए.’’ राधिका ने नेहा के बाल सहलाते हुए कहा.

‘‘हैलो पापा.’’ नेहा ने धीमी आवाज में पापा का स्वागत किया.

‘‘राधिका नेहा को कुछ हुआ है क्या, जो इतनी सुस्त लग रही है? परेशान होने की कोई बात नहीं है, इस के पेट में थोड़ा दर्द है.’’

राकेश ने नेहा को गोद में बिठा कर प्यार से उस की नाक पकड़ कर हिलाई तो कुछ कहने के बजाय नेहा ने मुसकरा दिया. रात को होमवर्क करने के बाद वह सिर्फ एक गिलास दूध पी कर सो गई.

अगले दिन सुबह नेहा स्कूल जाने के लिए नहीं उठ सकी. राधिका उसे जगाने आई तो वह उदास लेटी छत को एकटक ताक रही थी. नेहा के मासूम चेहरे पर आंखों से बहे आंसू सूख कर अपने वजूद की गवाही दे रहे थे. मम्मी कब उस के पास आ कर बैठ गईं, नेहा को पता ही नहीं चला था.

राधिका ने प्यार से उस के सिर पर हाथ फेरते हुए उस के मासूम चेहरे को ध्यान से देखा. उन्हें लगा कि नेहा कुछ ज्यादा ही परेशान है तो उन्होंने पूछा, ‘‘बेटा मम्मा को बताओ ना क्या बात है? आप ने होमवर्क नहीं किया क्या या फिर स्कूल के टीचर आप को डांटते हैं?’’

‘‘मम्मी, ऐसी कोई बात नहीं है. मैं अपना सारा काम कम्पलीट रखती हूं. इसलिए मुझे कोई टीचर नहीं डांटता.’’ नेहा ने दबी आवाज में कहा.

‘‘तो फिर क्या बात है बेटा?’’

‘‘मम्मी, कुछ दिनों से मेरे पेट में दर्द रहता है. मेरा पेट भी पहले से बड़ा हो गया है.’’

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राधिका ने नेहा की फ्रौक को ऊपर की ओर खिसका कर उस के पैर को गौर से देखा तो उन्हें लगा कि शायद नेहा के पेट में सूजन आ गई है. उन्होंने यह बात राकेश को बताई तो उन्होंने पत्नी को तसल्ली देते हुए कहा, ‘‘चलो, आज इसे डाक्टर को दिखा देते हैं. लापरवाही करना ठीक नहीं है. राधिका, तुम इसे नाश्ता कराओ, तब तक मैं नहाधो कर तैयार हो जाता हूं.’’

ठीक 11 बजे राकेश राधिका और नेहा को ले कर अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने नंबर लिया और डा. राहुल जैन के चैम्बर के सामने पड़े सोफे पर बैठ गए. नंबर आने पर वह नेहा को ले कर अंदर गए, जबकि राधिका बाहर ही बैठी रही. डा. राहुल जैन ने नेहा से कई सवाल किए. इस के बाद उन्होंने कहा, ‘‘पहले आप बच्ची का सोनोग्राफी करा लीजिए. उस के बाद जो रिपोर्ट आएगी, उस के अनुसार ही इलाज होगा.’’

डाक्टर की पर्ची और नेहा को साथ ले कर राकेश अस्पताल में उस ओर बढ़ गए, जिधर सोनोग्राफी होती थी.

सोनोग्राफी की रिपोर्ट 2 घंटे बाद मिल गई. राकेश राधिका और नेहा को सोफे पर बैठा कर अकेले ही डाक्टर की केबिन में दाखिल हो गए. रिपोर्ट देख कर डा. जैन सन्न रह गए. उन के चेहरे से लगा, जैसे रिपोर्ट पर उन्हें विश्वास नहीं हुआ हो. उन्होंने एक बार फिर रिपोर्ट को गौर से देखा. उस के बाद दबे स्वर में कहा, ‘‘मि. राकेश, नेहा इज प्रेग्नेंट.’’

यह सुन कर राकेश अवाक रह गए. वह जिस तरह बैठे थे, उसी तरह बैठे रह गए. मानो कुछ सुना ही न हो. वह डा. जैन को बिना पलक झपकाए देखते रह गए. जबकि उन्हें कुछ दिखाई नहीं दे रहा था. उन की आंखों के सामने अंधेरा छा गया था.

‘‘मिस्टर राकेश, खुद को संभालिए.’’ डा. जैन ने उन्हें दिलासा देते हुए कहा.

राकेश पसीने से पूरी तरह तर हो चुके थे. एकबारगी उठ कर बाहर आ गए. उन का हाल देख कर राधिका सहम उठी. डरतेडरते उन्होंने पूछा, ‘‘रिपोर्ट देख कर क्या बताया डाक्टर ने.’’

राकेश किस तरह बताते कि उन की कली जैसी बेटी मां बनने वाली है. वह निढाल हो कर सोफे पर बैठ गए.

‘‘क्या बात है जी?’’ राधिका ने बेचैनी से पूछा, ‘‘आप बताइए न, क्या हुआ है मेरी बच्ची को, आप बताते क्यों नहीं हैं?’’

राकेश की खामोशी राधिका के दिल में नश्तर की तरह चुभ रही थी. पत्नी को बेचैन देख कर राकेश ने रुंधी आवाज में कहा, ‘‘घर चल कर बताता हूं.’’

2 किलोमीटर का सफर पूरा होने में जैसे युग लग गया. इस बीच राधिका के मन में न जाने कितने खयाल आए. तरहतरह की आशंकाएं उसे परेशान करती रहीं. घर पहुंच कर राकेश ने नेहा को बिस्तर पर लिटा कर आराम करने को कहा.

लेटने के बाद नेहा ने पूछा, ‘‘पापा, डाक्टर अंकल ने क्या बताया, मेरे पेट का दर्द कब ठीक होगा? मेरे टेस्ट होने वाले हैं. आप डाक्टर अंकल से कहिए कि मुझे जल्दी से ठीक कर दें, वरना पूजा के नंबर मुझ से ज्यादा आ जाएंगे.’’

राकेश ने नेहा के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटा, आप जल्दी ठीक हो जाओगी. घबराने की कोई बात नहीं है.’’

राधिका बड़ी बेसब्री से राकेश का इंतजार कर रही थी. जैसे ही राकेश उन के पास आए, उन्होंने बेचैनी से पूछा, ‘‘डा. साहब ने क्या बताया है, क्या हुआ है मेरी बच्ची को?’’

राधिका की बांह पकड़ कर राकेश ने कहा, ‘‘आप को किस मुंह से अपनी बरबादी की कहानी सुनाऊं. हम लोग लुट गए राधिका. बर्बाद हो गए. हम किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे. डाक्टर ने बताया है कि नेहा 6 महीने की गर्भवती है.’’

राकेश का इतना कहना था कि राधिका को ऐसा लगा कि सब कुछ घूम रहा है. आंखों के सामने अंधेरा छाने लगा है. वह गिरी और बेहोश हो गई.

राकेश उस के मुंह पर पानी के छींटे मारते हुए उसे होश में लाने की कोशिश करने लगे. कभी वह उन का मुंह पकड़ कर हिलाते तो कभी कहते, ‘‘उठो राधिका, उठो खुद को संभालो. वरना नेहा का क्या होगा?’’

कुछ देर में राधिका उठी और पति के गले लग कर फफकफफक कर रोने लगी, पतिपत्नी की समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब कैसे हुआ, किस ने नेहा के साथ यह गंदा काम किया? रोतेरोते राधिका ने कहा, ‘‘हमारी बेटी के साथ यह नीच हरकत किस ने की, किस ने मासूम कली को बेरहमी से मसल दिया? उस कमीने को हमारी मासूम बेटी पर जरा भी तरस नहीं आया. उस ने हमें समाज में मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा.’’

इस के बाद आंचल से आंखें साफ कर के राधिका नेहा के पास आ गई. प्यार से उस के सिर हाथ फेरते हुए कहा, ‘‘बेटी नेहा, अब तबीयत कैसी है?’’

‘‘मम्मी अब थोड़ा ठीक है, लेकिन बीचबीच में दर्द होने लगता है.’’ नेहा ने मासूमियत से कहा.

‘‘डाक्टर अंकल ने कहा है कि नेहा बहुत जल्दी ठीक हो जाएगी.’’ राकेश ने दिल पर पत्थर रख कर मुश्किल से बेटी को समझाया.

पतिपत्नी में से किसी की हिम्मत नहीं हो रही थी कि नेहा से किस तरह से इस मुद्दे पर बात करें. लेकिन बात तो करनी ही थी. आखिर राधिका ने नेहा से बड़े प्यार से पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ स्कूल में किसी ने गलत काम किया है क्या?’’

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‘‘नहीं मम्मी, किसी ने मेरे साथ कोई गलत काम नहीं किया है.’’

एक मांबाप के लिए शायद दुनिया में सब से बुरा सवाल यही होगा. खैर, काफी समझानेबुझाने पर नेहा ने बताया, ‘‘पवन भैया मेरे साथ गंदा काम करते थे.’’

पवन नेहा की बुआ यानी राकेश की बहन का बेटा था. इसलिए उस के घर आनेजाने में किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं थी. नेहा के इस जवाब से पतिपत्नी सिर थाम कर बैठ गए. घर का भेदी लंका ढाए. नेहा को गले लगा कर राधिका ने उस के कान के पास अपना मुंह ले जा कर लगभग फुसफुसाते हुए पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ पवन कब से यह गंदा काम कर रहा था? आप ने मम्मीपापा को यह बात पहले क्यों नहीं बताई.’’

नेहा के आंसू नाजुक गालों से होते हुए राधिका के कंधे को भिगो रहे थे. उस ने सिसकते हुए कहा, ‘‘मम्मी, आप को कैसे बताती. पवन भैया मुझे मार देते. वह मेरे साथ गलत काम करते थे. उस के बाद कहते थे कि किसी को कुछ बताया तो तेरा गला दबा कर जान ले लूंगा.’’

नेहा अभी भी उस वहशी को भइया कह रही थी. राधिका ने पूछा, ‘‘बेटा, आप के साथ यह गंदा काम कब से हो रहा था?’’

‘‘मम्मी जब आप घर का सामान लेने बाजार जाती थीं, उसी बीच भैया आ कर मेरे साथ जबरदस्ती करते थे. उस के बाद चौकलेट देते. मैं चौकलेट लेने से मना करती तो मुझे मारने की धमकी देते. किसी से कुछ बताने को भी मना करते थे. मम्मी, मैं बहुत डर गई थी, इसलिए आप लोगों को कुछ नहीं बता पाई.’’

‘‘कोई बात नहीं बेटा.’’ राकेश ने खुद को झूठी दिलासा देते हुए कहा.

‘‘सुनिए जी, अब क्या किया जाए?’’ राधिका ने पूछा.

‘‘अब क्या होगा. कुछ भी हो मैं इस वहशी को जिंदा नहीं छोड़ूंगा, इस के लिए चाहे मुझे जेल ही क्यों न जाना पड़े.’’ राकेश ने कहा.

‘‘नहीं, पहले आप नेहा के बारे में सोचिए. चलो डा. जैन को एक बार और दिखाएं और नेहा का अबौर्शन कराना जरूरी है. उस के बाद आगे की काररवाई करेंगे.’’

‘‘यह भी ठीक रहेगा,’’ राकेश ने मरजी के विपरीत हामी भरी.

इस के बाद अस्पताल जा कर डा. जैन से नेहा का गर्भ गिराने के लिए कहा तो डा. जैन ने कहा, ‘‘देखिए, मिस्टर राकेश, यह पुलिस केस है, इसलिए पहले आप एफआईआर कराएं, उस के बाद ही कुछ हो सकता है.’’

‘‘डाक्टर साहब, ऐसा अत्याचार मुझ पर मत कीजिए. मैं वैसे ही बहुत परेशान हूं, अब आप भी परेशान न करें.’’ राकेश ने गिड़गिड़ाते हुए कहा.

‘‘देखिए, आप समझने की कोशिश कीजिए राकेशजी. आप की बेटी 6 महीने की गर्भवती है. इसलिए उस का अबौर्शन नहीं किया जा सकता. उस की जान को खतरा हो सकता है.’’

‘‘डाक्टर साहब, अब हम इस पाप का क्या करें. हम तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहे.’’

‘‘राकेशजी, आप समझने की कोशिश कीजिए. ऐसा करने से नेहा की जान जा सकती है. फिर यह गैरकानूनी भी है, सो आई एम सौरी.’’ डा. राहुल जैन ने हाथ खड़े कर दिए.

नेहा 3 दिनों से अस्पताल में भरती थी. वह मम्मीपापा से बारबार पूछ रही थी कि अस्पताल से उसे कब छुट्टी मिलेगी. उस की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. 15 तारीख से उस के इंटरनल शुरू होने वाले हैं. जबकि उस ने अभी तैयारी भी नहीं की है. उसे पूजा के साथ खेलना है.

राकेश ने कोर्ट से नेहा का गर्भपात कराने की इजाजत मांगी, लेकिन फिलहाल अभी उन्हें इस में कामयाबी नहीं मिली है. पवन के खिलाफ थाने में विभिन्न धाराओं के अंतर्गत मुकदमा दर्ज करा दिया गया है, उस की धरपकड़ के लिए पुलिस जगहजगह छापे मार रही है. लेकिन अभी वह पकड़ा नहीं जा सका है. पुलिस ने उस की गिरफ्तारी के लिए उस का फोन नंबर ही नहीं, उस के दोस्तों, रिश्तेदारों और घर वालों के फोन नंबर सर्विलांस पर लगा रखे हैं.

अब देखना यह है कि क्या कोर्ट राकेश की फरियाद पर नेहा का गर्भपात कराने की इजाजत देता है. इस के लिए कोर्ट पहले डाक्टरों के पैनल से रिपोर्ट मांगेगा कि गर्भपात कराने से 12 साल की बच्ची को कोई नुकसान तो नहीं पहुंचेगा. इस रिपोर्ट के बाद कोर्ट कोई फैसला देगा. लेकिन फैसला आने तक राकेश और राधिका के लिए एकएक पल गुजारना वर्षों गुजारने के बराबर है, जो उन्हें हर एक पल बर्बादी का अहसास दिलाता है.

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राधिका ने राकेश से उलाहना देते हुए कहा, ‘‘मैं आप से हमेशा कहती थी कि पवन पर आंख मूंद कर के इतना भरोसा मत करो, लेकिन आप को उस पर बड़ा नाज था. आप हमेशा मेरी बातों को नजरअंदाज करते थे.’’

‘‘राधिका अब बस भी करो, मैं वैसे ही बहुत परेशान हूं, मुझे क्या पता था कि वह मेरे भरोसे का इतना बुरा सिला देगा. चलो, मैं तुम्हारी बात मानता हूं कि अगर पवन को इतनी छूट न देता तो आज हमें यह दिन देखना न पड़ता.’’

इस के बाद एक लंबी सांस ले कर राकेश ने आगे कहा, ‘‘चलो, मान लिया मेरी गलती से यह हुआ, लेकिन तुम्हारी भी गलती कम नहीं है. नेहा को प्रैग्नेंट हुए आज पूरे 6 महीने हो गए हैं और तुम्हें इस की जरा भी भनक नहीं लग सकी. राधिका, मैं तो पूरा दिन औफिस में रहता हूं, लेकिन तुम भी तो नेहा का ध्यान नहीं रख पाईं. उस दरिंदे के भरोसे नेहा को अकेली छोड़ कर क्यों बाजार चली जाती थीं? तुम्हें नेहा से हर तरह की पूछताछ करनी चाहिए थी. तुम उस की मां होेने के साथ, उस की सखीसहेली भी हो, सुनो राधिका, होनी को कोई नहीं टाल सकता, लेकिन सावधानी जरूरी है. हर किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए चाहे कोई कितना ही सगा रिश्तेदार क्यों न हो.’’

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