निकाह से पहले हिना ईद के चांद का बड़ा बेसब्री से इंतजार किया करती थी लेकिन निकाह के बाद तो ईद के चांद का दीदार मुश्किल हो गया था. ठीक उस के शौहर नदीम की तरह.

उस दिन रमजान की 29वीं तारीख थी. घर में अजीब सी खुशी और चहलपहल छाई हुई थी. लोगों को उम्मीद थी कि शाम को ईद का चांद जरूर आसमान में दिखाई दे जाएगा. 29 तारीख के चांद की रोजेदारों को कुछ ज्यादा ही खुशी होती है क्योंकि एक रोजा कम हो जाता है. समझ में नहीं आता, जब रोजा न रखने से इतनी खुशी होती है तो लोग रोजे रखते ही क्यों हैं?

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