दुनिया कितनी छोटी है, इस का अंदाजा महाबलेश्वर में तब हुआ, जब बारिश में भीगने से बचने के लिए दुकान की टप्परों के नीचे शरण लेती रेवती को देखा. जयपुर में वह और रेवती एक ही औफिस में काम करते थे.आज काफी समय बाद पर्यटन स्थल की अनजान जगह पर रेवती से मिलना एक बड़ा इत्तिफाक और रोमांचकारी था. खुशी से बौराती सौम्या रेवती के गले लगते हुए बोली, “कहां रही इतने दिन...? कितना फोन लगाया तुझ को, लगता ही नहीं था... कैसी हो तुम?”

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