‘‘अब आ भी जाओ सुनी, इतनी देर से कंप्यूटर पर क्या कर रही है?’’

सुनील अधीर हो रहा था सुनयना को अपनी बांहों में लेने के लिए, पर सुनयना को उसे तड़पाने में मजा आ रहा था. उस ने एक नजर सुनील को देखा, फिर शरारत से मुसकरा कर वापस कंप्यूटर पर अपना काम करने लगी.

‘‘आ रही हूं, बस अपनी प्रोफाइल पिक्चर लगा दूं.’’

‘‘अरे नहीं, ऐसा मत करना. तुम्हारा यह दीवाना क्या कम है जो अब फेसबुक पर भी अपने दीवानों की फौज खड़ी करना चाहती हो,’’ सुनील परेशान होने का नाटक करता हुआ बोला.

सुनयना ने उस की बात पर ध्यान न देते हुए फोटोगैलरी से एक खूबसूरत सी फोटो ढूंढ़ निकाली, जिस में उस ने पीले रंग की सिल्क की साड़ी पहनी हुई थी और अपने सुंदर, लंबे, कालेघने बालों को आगे की ओर फैला रखा था. अपनी प्रोफाइल पिक्चर लगाते हुए वह गुनगुनाने लगी, ‘‘ऐ काश, किसी दीवाने को हम से भी मोहब्बत हो जाए…’’

‘‘है वक्त अभी तौबा कर लो अल्लाह मुसीबत हो जाए,’’ सुनील ने गाने की आगे की लाइन को जोड़ा और उसे कंप्यूटर टेबल से अपनी गोद में उठा कर बैड पर ले आया. सुनील की बांहों में सिमटी सुनयना के चेहरे पर आज अजब सी मुसकराहट थी.

‘‘अब पता चलेगा बच्चू को, हर वक्त मुझे चिढ़ाता रहता है.’’

सुदर्शन व्यक्तिव और हंसमुख स्वभाव का धनी सुनील कालेज में सभी लड़कियों के आकर्षण का केंद्र था. उस के पास गर्लफ्रैंड्स की लंबी लिस्ट थी जिन्हें ले कर वह अकसर सुनयना को चिढ़ाया करता था और सुनयना चिढ़ कर रह जाती थी. कभीकभी सोचती कि काश, शादी से पहले उस का भी कम से एक अफेयर तो होता, तो वह भी सुनील को करारा जवाब दे पाती.

सुनील के मोबाइल की फोटोगैलरी में न जाने कितनी लड़कियों की फोटोज होतीं जिन्हें दिखादिखा कर वह सुनयना को चिढ़ाता और उस की आंखों में जलन व चेहरे पर कुढ़न देख कर मजे लेता रहता. पर उसे यह कह कर मना भी लेता, ‘‘ये सब तुम्हारे आगे पानी भरती हैं सुनी, कहां ये सब लड़कियां और कहां तुम, तभी तो मैं ने तुम्हें चुना है. लाखों में एक है मेरी सुनी,’’ कहतेकहते सुनील उसे बांहों में भर लेता और सुनयना भी उस की आगोश में आ कर समंदर में गोते लगाती. थोड़ी देर के लिए सारी जलन और कुढ़न भूल जाती. पर एक अफेयर तो उस का भी होना चाहिए था, यह बात अकसर उसे परेशान कर जाती.

‘‘मैं मान ही नहीं सकता कि शादी से पहले तुम्हारा कोई बौयफ्रैंड नहीं रहा होगा. अरे, इतनी सुंदर लड़की के पीछे तो लड़कों की भीड़ चलती होगी.’’

कभीकभी सुनील छेड़ता तो सुनयना को वह लड़का याद आ जाता जिस ने उसे तब देखा था जब वह अपनी सहेली रमा के साथ उन के समाज के एक विवाह सम्मेलन में शामिल होने गई थी. रमा ने बताया था कि उस लड़के की शादी उस की बूआ की बेटी के साथ होने वाली है. बाद में पता चला कि उस लड़के ने वहां रिश्ता करने से मना कर दिया था क्योंकि उसे पहली नजर में ही सुनयना भा गई थी. उस के बाद वह जहां भी जाती, उस लड़के, जिस का नाम मनोज था, को अपने पीछे पाती. पर बड़ी चतुराई से वह उसे नजरअंदाज कर जाती थी. वैसे देखने में मनोज किसी हीरो से कम नहीं लगता था पर बात यहां दिल की थी. सुनयना का दिल तो कभी किसी पर आया ही नहीं. आया तो आया बस सुनील पर ही जब वह उसे देखने अपने मम्मीपापा के साथ आया था. पहली नजर का प्यार बस उसी पल जागा था और आंखें मौन स्वीकृति दे चुकी थीं.

पहले पगफेरे के लिए जब मायके आई और सुनील के साथ साड़ी मार्केट गई थी तब एक दुकान पर टंगी साड़ी सुनील को पसंद आ रही थी. दुकानदार से मुखातिब हुए तो मनोज सामने आ गया. सुनयना ने झेंप कर उसे भैया कह कर संबोधित किया तो मनोज के चेहरे का रंग उड़ गया.

अगले दिन अपनी फेसबुक प्रोफाइल देखी तो 20 फ्रैंड रिक्वैस्ट आ चुकी थीं. सुनयना मुसकरा कर सब की प्रोफाइल का मुआयना करने लगी. मैसेंजर पर भी ढेरों मैसेज आए थे. सारे मैसेज उस की तारीफों के पुल से अटे पड़े थे. एक मैसेज पढ़ कर उस के चेहरे पर मुसकान आ गई जिस में लिखा था-

‘आप बहुत खूबसूरत हैं. काश, आप मुझे पहले मिल जातीं, तो मैं आप से शादी कर लेता.’

‘पर आप मुझ से बहुत छोटे हैं, फिर यह कैसे संभव होता,’ सुनयना ने लिखा तो वहां से भी जवाब आ गया.

‘प्यार उम्र नहीं देखता मैम, प्यार तो हर सीमा से परे अपनी मंजिल ढूंढ़ लेता है.’ वहां से जवाब आया तो सुनयना ने स्माइल करता इमोजी डाल दिया. उस का नाम सौरभ था और वह दिल्ली में रहता था.

अब तो जब भी सुनयना फेसबुक पर आती, सौरभ से चैटिंग होती. उस की बातों से लगता था कि वह सुनयना का दीवाना हो चुका था. इन दिनों सुनील को भी सुनयना कुछ ज्यादा ही खूबसूरत और रोमांटिक लगने लगी थी. अब उस ने सुनील की सहेलियों से चिढ़ना भी बंद कर दिया था. जब भी सुनील उसे किसी लड़की की फोटो दिखा कर चिढ़ाता, तो वह चिढ़ने के बजाय मंदमंद मुसकराने लगती.

‘‘आजकल तुम बहुत बदल गई हो, पहले से ज्यादा खूबसूरत हो गई हो, ज्यादा संवर कर रहने लगी हो. क्या बात है, कहीं सचमुच मेरा कोई रकीब तो पैदा नहीं हो गया.’’ सुनील कभीकभी हैरानी से कहता तो सुनयना भी आंखें मटका कर जवाब देती.

‘‘हो सकता है.’’

‘‘पर जरा, संभल कर, इन मनचलों का कोई भरोसा नहीं, खुद को किसी मुसीबत में न फंसा लेना.’’

‘‘डौंट वरी सुनील, ऐसा कुछ नहीं होगा,’’ सुनयना लापरवाही से कहती.

आजकल वह जल्दी काम से फ्री हो कर औनलाइन आ जाती. रोजाना चैट करते हुए सौरभ उस से काफी खुल चुका था. मैम से सुनयना और तुम संबोधन तक बात पहुंच गई थी.

‘‘सुनयना मैं तुम से प्यार करने लगा हूं.’’

‘‘सौरभ, तुम नहीं जानते मैं, शादीशुदा हूं.’’

‘‘इस से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता. मैं सिर्फ इतना जानता हूं कि अब मेरा तुम्हारे बिना रहना मुश्किल होता जा रहा है. तुम अब मेरी जान बन चुकी हो और मुझे तुम से मिलना है, बस.’’

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‘‘मैं तुम से नहीं मिल सकती सौरभ और वैसे भी तुम अपनी हद पार कर रहे हो.’’

‘‘हद तो पार हो ही चुकी है सुनयना. बस, तुम जल्दी से अपना पता बता दो. मैं आ जाऊंगा.’’

बहुत समझाने पर भी सौरभ एक ही बात पर अड़ गया तो सुनयना को झुंझलाहट होने लगी. उस ने कुढ़ते हुए सौरभ को ब्लौक किया और बुदबुदाने लगी, ‘ये सारे लड़के एकजैसे होते हैं. सिर्फ चैटिंग काफी नहीं थी, जो मिलना चाहता है. मैं बिना अफेयर के ही भली थी.’

शाम को जब सुनील घर आया तो उस का उखड़ा हुआ मूड देख कर तुरंत माजरा समझ गया.

‘‘क्यों, कर दिया उसे ब्लौक?’’ सुनील ने कहा. सुनयना देखती रह गई. ‘इसे यह कैसे पता चल गया.’ सुनील सुनयना को देख कर हंसे जा रहा था.

‘‘यहां मेरी जान पर बन आई है और तुम्हें हंसी सूझ रही है,’’ सुनयना ने खिसियाते हुए कहा.

‘‘हंसूं नहीं तो और क्या करूं सुनी, यह अफेयरवफेयर तुम्हारे बस की बात नहीं. और उस लड़के से डरने की जरूरत नहीं. मैं इस तरह के लड़कों को अच्छी तरह जानता हूं. इन लोगों की सोच ही घटिया होती है.’’

सुनील की बात सुन कर सुनयना की फिक्र कुछ कम हुई और सुनील ने उस के सामने अपने मोबाइल से सारी लड़कियों की फोटोज डिलीट कर दीं. सौरभ को ब्लौक करने के बाद भी कुछ दिनों तक सुनयना का मूड थोड़ा उखड़ाउखड़ा रहा. इसलिए उस ने फेसबुक पर लौगइन नहीं किया था. पर एक दिन बोरियत से परेशान हो कर उस ने सोचा, आज फेसबुक पर सहेलियों से कुछ चैटिंग करती हूं और उस ने लौगइन किया तो यह देख कर अवाक रह गई कि सौरभ ने अपनी दूसरी आईडी बना कर उसे वापस न सिर्फ फ्रैंड रिक्वैस्ट भेजी, बल्कि इनबौक्स में उस के लिए ढेर सारे मैसेज भी छोड़ रखे थे.

‘‘यों मुझे ब्लौक कर के मुझ से पीछा नहीं छूटेगा जानेमन. मेरी फ्रैंड रिक्वैस्ट एक्सैप्ट कर लेना. अब तुम्हारे बिना जिया नहीं जाता.’’

‘‘क्या हुआ फेसबुक छोड़ कर भाग गईं क्या?’’

‘‘अपना पता दे दो, प्लीज.’’

इस तरह के मैसेज पढ़ कर सुनयना का सिर घूम गया.

‘यह क्या मुसीबत पाल ली मैं ने. अब क्या होगा, यह तो पीछे ही पड़ गया.’

सोचसोच कर सुनयना परेशान हो रही थी. उस ने गुस्से में फेसबुक बंद किया और सिर पकड़ कर बैठ गई. पर इस मुसीबत की हद उतनी नहीं थी जितनी उस ने सोची थी. सौरभ उस की सोच से बढ़ कर मक्कार निकला, उस ने सुनयना की फेसबुक आईडी हैक कर ली और उस की सहेलियों को उलटेसीधे मैसेज भेजने शुरू कर दिए. सुनयना को तब पता चला जब उस की सहेलियों के फोन आने शुरू हुए. आखिर उस ने सार्वजनिक मैसेज कर सब से माफी मांगी और सब को बताया कि उस की फेसबुक आईडी हैक हो चुकी है. हार कर उसे अपनी फेसबुक आईडी डिऐक्टिवेट करनी पड़ी. पर सौरभ कहां पीछा छोड़ने वाला था. उस रोज सुबह घर के काम से फ्री हो कर अपने बैड पर बैठी मैगजीन पढ़ रही थी कि तभी दरवाजे की घंटी बजी. दरवाजा खोला तो सौरभ को सामने पा कर वापस दरवाजा बंद करने लगी पर सौरभ उसे ढकेल कर अंदर आ गया.

‘‘तुम, तुम यहां कैसे? घर का पता कहां से मिला?’’

सुनयना के शब्द उस के मुंह में ही अटक रहे थे.

‘‘हम प्यार करने वाले हैं जानेमन, फिर आजकल किसी का भी पता ढूंढ़ना मुश्किल थोड़े ही है. वोटर आईडी से किसी का भी पता मालूम चल जाता है. बस, हम ने तुम्हारा पता ढूंढ़ा और पहुंच गए अपनी जान से मिलने.’’

जानेमन, यह शब्द सुन कर सुनयना को खुद से ही घिन आ रही थी और सौरभ सोफे पर धंसा बोलता रहा.

‘‘यार, तुम ने तो एक ही झटके में हम से पीछा छुड़ा लिया और हम हैं कि तुम से प्यार कर बैठे.’’

गुस्से और डर से सुनयना का चेहरा लाल हुआ जा रहा था. पर किसी तरह खुद को संभालते हुए उस ने कहा, ‘‘अब आ ही गए हो तो बैठो, तुम्हारे लिए पानी लाती हूं.’’

उस ने रसोई में जा कर लंबीलंबी सांसें लीं और कुछ सोचने लगी.

‘‘ये लो पानी.’’

कह कर सुनयना सौरभ के सामने बैठ गई और बोली, ‘‘देखो सौरभ, सुनील के घर आने का वक्त हो रहा है, इसलिए अभी तुम जाओ. मैं तुम से वादा करती हूं, तुम से मिलने जरूर आऊंगी.’’

‘‘कब, कहां मिलोगी, जल्दी बताओ,’’ सौरभ के चेहरे पर कुटिल मुसकान आ गई.

‘‘जल्द ही मिलूंगी. यह तुम से वादा रहा.’’

‘‘पहले बताओ, कहां मिलोगी? तभी मैं यहां से जाऊंगा.’’

‘‘फोन पर बता दूंगी. अब जाओ.’’

सौरभ आश्वस्त हो कर चला गया तो सुनयना निढाल सी सोफे पर धंस गई. उस ने कभी सोचा भी नहीं था कि जरा सी दिल्लगी उसे मुसीबत में डाल देगी.

‘‘मैं ने तुम से कहा था मुसीबत में मत पड़ जाना. अब पड़ गया न वह पीछे.’’

सुनील को सारी बात पता चली तो वो झल्लाने लगा और सुनयना बस रोए जा रही थी.

‘‘अब रोओ मत, चलो, आंसू पोंछ लो. इस सौरभ को तो मैं ऐसा सबक सिखाउंगा कि याद रखेगा.’’

‘‘क्या करोगे तुम?’’ सुनयना ने अपनी साड़ी के पल्लू से आंसू पोंछते हुए कहा.

‘‘उसे फोन करो और लोधी गार्डन बुलाओ, कहना वहीं मिलोगी.’’

सुनयना लोधी गार्डन में एक बैंच पर बैठी थी. सौरभ सही समय पर आ गया था. वह अपनी जीत पर बड़ी कुटिलता से मुसकरा रहा था पर उस की यह मुसकान ज्यादा देर न रही. सुनील और उस के दोस्त, जो झाडि़यों के पीछे छिपे थे, बाहर आए और सौरभ को घेर लिया.

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‘‘क्यों बे, ज्यादा आशिकी सवार हुई है क्या? शादीशुदा औरतों को फंसाता है?’’

ुकह कर सुनील ने उस की पिटाई शुरू कर दी. इतने सारे लोगों को एकसाथ देख कर उस की सारी आशिकी हवा हो गई और वह भागने लगा. पर उन सब ने उसे पकड़ लिया और पुलिस में देने की बात करने लगे तो सौरभ गिड़गिड़ाने लगा. माफी मांगने और आइंदा कभी ऐसी हरकत न करने का वादा ले कर ही उसे छोड़ा गया. इस तरह एक अफेयर का अंत हुआ.

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