Hindi Stories: पंडित बजरंगी और मेरे बीच बहस काफी देर से चल रही थी. वह कह रहे थे कि हर काम भगवान की इच्छा से होता है और मैं तर्क के साथ उन की बातों का विरोध कर रहा था. अपनी लगातार हार के कारण वह काफी झुंझला गए थे और उन का गुस्सा कचकचा कर बाहर भी निकल आया था, लेकिन फिर यह सोच कर कि यजमान नाराज हो जाएगा तो मुफ्त की कमाई चली जाएगी, उन्होंने भोंडी मुसकान के साथ बातों का लेप लगा दिया.

उधर मेरी पत्नी की घूरती आंखें मुझे टोक रही थीं जिस का मतलब था कि अब चुप हो जाइए, बहुत हो चुकी यह बहस. यह बहस मेरे टूटे हुए पैर के कारण और निवारण पर चल रही थी. पिछले सप्ताह मैं मोटरसाइकिल से अपनी ससुराल से लौट रहा था. चूंकि रास्ते में मेरी बूआजी का गांव पड़ता है अत: मेरा विचार बना कि वहां से होता हुआ अपने गांव जाऊंगा. बूआ के गांव का रास्ता बहुत ऊबड़खाबड़ था, जिस पर बीचबीच में बरसाती गड्ढे बने हुए थे. एक जगह इसी तरह का एक गड्ढा बचाने की कोशिश में मेरी मोटरसाइकिल फिसल कर किनारे की पक्की नाली में चली गई और नाली की दीवार से टकरा कर मेरे बाएं पैर की हड्डी टूट गई. फिर स्थानीय लोगों ने मेरे बताने पर मुझे ससुराल पहुंचा दिया था. तब से प्लास्टर लगने के बाद मैं वहीं पड़ा हुआ हूं. शहर होने के कारण यहां हर तरह की सुविधाएं उपलब्ध हैं.

पंडितजी की मानें तो मेरे पैर टूटने का कारण सिर्फ यही है कि आजकल मेरे ग्रह ठीक नहीं चल रहे हैं इसलिए यह दुर्घटना हुई है. यदि विधिवत पूजापाठ कर के ग्रहों को शांत न किया गया तो भविष्य में इस से भी बड़ा अनिष्ट हो सकता है.

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