किसी ने घंटी बजाई. मैं ने छोटी बहन को भेजा, ‘‘देखना, कौन है?’’ उस ने किवाड़ खोले और चौड़ी सी संधि बना कर वहीं खड़ी बाहर किसी से बात करती रही. मैं उत्सुक था कि आखिर कौन है जो भीतर नहीं बुलाया जा सकता? मैं ने बैठेबैठे ही पूछा, ‘‘कौन है?’’

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