कहानी के बाकी भाग पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

दोनों के बीच बहुत अच्छी सूझबूझ थी. आज दोपहर में राम लाल को देख कर मैडम ने पूछा, “कैसे हो राम लाल?“ “ठीक हूं मैडम. “ “बेटी के रिश्ते की बात कहीं पक्की हुई? तुम कह रहे थे कि एक हफ्ते बाद बताऊंगा. पर, तुम तो जल्दी चले आए.“

“काम जल्दी हो गया था. मैं लड़के वालों से मिल कर आ गया हूं. वे लोग बहुत अच्छे हैं. उन्होंने शादी में किसी चीज की मांग नहीं रखी. बस शादी का इंतजाम ठीक  चाहते हैं.“ “यह तो बहुत अच्छी बात है. बेटी की शादी कर के तुम भी गंगा नहा जाओगे.“

“आप की नजर रही तो वह भी ठीक से निबट जाएगी.“ “शादी के लिए तुम्हें रुपयों की जरूरत होगी.“ “जी मैडम. मैं उसी के लिए आप के पास आया हूं. वह चट मंगनी और पट ब्याह चाहते हैं. उन की हैसियत  के अनुसार शादी करने के लिए मुझे कुछ रुपयों की जरूरत है.“

“उस की तुम चिंता न करना. अभी दे दूं 5 लाख रुपए.“ “आप से आश्वासन मिल गया तो मैं कल ही उन से रिश्ता पक्का करने की बात कह देता हूं. रुपयों की वजह से मैं उन्हें तारीख नहीं दे पाया था. मैं रुपए कुछ दिन बाद ले लूंगा.“

“अच्छे काम में देरी नहीं करनी चाहिए. और भी जरूरत पड़े तो बेहिचक कहना. तुम्हारी बेटी हमारी बेटी समान है.“ रुपयों की व्यवस्था हो जाने पर राम लाल खुशीखुशी घर लौट आया था. मैडम ने हमेशा की तरह इस बार भी मदद के लिए हाथ बढ़ा दिया था. घर आ कर राम लाल आराम से कुरसी पर पसर गया.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD10
सब्सक्राइब करें

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD79
सब्सक्राइब करें
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...