Family Story In Hindi : शादी जीवन का एक अहम फैसला होता है, जिसे वे चारों दोस्त ले चुके थे लेकिन उस फैसले में उन्हें अपने मातापिता की भी पूर्ण सहमति चाहिए थी क्योंकि वे अकेले नहीं, सब को साथ ले कर चलना चाहते थे.

कैंटीन में कोने की सीट पर चार दोस्तों की महफिल जमी थी. आसपास की चहलपहल से दूर वे अपनी ही बातों में गुम थे. चायकौफी की चुस्कियों के साथ उन का हंसीमजाक बदस्तूर जारी था. उन में कोई मितभाषी था तो कोई अंतर्मुखी, कोई चंचल तो कोई शांत पर दोस्ती चतुर्भुज जैसी जो सभी धर्मजाति से परे एक ऐसा वर्ग था जिस की समान आकार की भुजाएं चार दोस्त विजय, नंदिनी, अमन और शैली थे.

विजय, रवि और रमाजी का इकलौता बेटा था. विजय जब 17 वर्ष का था तब रविजी दिल्ली आ बसे थे. उन की कालोनी में ही नंदिनी का परिवार रहता था. विजय तब 11वीं कक्षा उत्तीर्ण कर के आया था और 12वीं कक्षा में एडमिशन के लिए काफी प्रयासरत था तब नंदिनी के पापा अनिलजी से हुए परिचय के कारण विजय का एडमिशन नंदिनी के ही स्कूल में हो गया था.

नंदिनी भी 12वीं कक्षा में ही थी और उस के बाद दोनों ने कालेज में एडमिशन भी एकसाथ ही लिया था. नंदिनी का एक बड़ा भाई था जो अपनी नौकरी के सिलसिले में लखनऊ में रहता था.

एडमिशन के दौरान काउंटर पर पेपर्स जमा करते हुए विजय और अमन की बातचीत हुई थी तो पता चला कि अमन भी उन्हीं की तरह कालेज में प्रथम वर्ष का विद्यार्थी था. इस तरह तीनों ने एकसाथ ही क्लास में प्रवेश किया.

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