Cricket and Politics: आजकल टीवी और मोबाइल पर आईपीएल और वनडे मैचों की बाढ़ सी आ गई है. हर तरफ क्रिकेट, क्रिकेट और क्रिकेट. लोग रातदिन इस के चर्चे करते हैं, सब काम छोड़ कर मोबाइल स्क्रीन पर नजरें गड़ाए रहते हैं, दांव लगाते हैं, भाव खाते हैं. लेकिन, क्या यह महज खेल है या फिर यह सत्ता के हाथों जनता को बेवकूफ बनाने का पुराना तरीका है? यह बिलकुल रोमन साम्राज्य की ब्रेड एंड सर्कस यानी रोटी और तमाशा वाली नीति जैसी लगती है. वहां शासक जनता को कोलेजियम में ग्लैडिएटर लड़वा कर व्यस्त रखते थे ताकि वे सत्ता के खिलाफ आवाज न उठाएं. आज भारत में बीजेपी सरकार आईपीएल जैसे महंगे तमाशों को थोक भाव में आयोजित कर जनता को वही सर्कस परोस रही है.

दिनेश ने नीट की एक साल जम कर तैयारी की थी. एग्जाम देने के बाद वह काफी खुश था. अचानक पता चला कि पेपर लीक हो गया. दिनेश सदमे में पहुंच गया था. दिनेश का बड़ा भाई गुड़गांव की एक कंपनी में काम करता था. दिनेश 2 साल से अपने बड़े भाई के घर पर रह कर ही तैयारी कर रहा था. अब दिनेश का पढ़ाई से मन ऊब चुका था और वह कोई छोटीमोटी नौकरी करना चाहता था. दिनेश के बड़े भाई नितिन को दिनेश के फ्यूचर की कोई चिंता नहीं थी. नितिन तो क्रिकेट का दीवाना था. उसे आईपीएल की ऐसी लत लगी कि वह दिनभर मोबाइल स्क्रीन पर लगा रहता. इधर आईपीएल खत्म हुआ उधर नितिन की नौकरी छूट गई. अब दिनेश के लिए नौकरी जरूरी हो गई. आखिरकार, उसे जोमैटो में होम डिलीवरी का काम करना पड़ा.

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