Missing Trees: बांसवाड़ा जिले में सरकार ने 50 हजार पौधे लगाने का टारगेट रखा था. वन विभाग को आदेश मिला, बजट मिला, बैनर भी लग गए लेकिन हुआ क्या? 50 हजार पौधों के लिए 50 हजार गड्ढे चाहिए थे. खोदे गए सिर्फ 24,285. यानी, टारगेट का आधा भी नहीं. जो 24,285 गड्ढे खोदे गए उन में भी पौधे लगे सिर्फ 8,520, बाकी गड्ढे वैसे ही खुले पड़े हैं. 50 हजार का वादा था, लगे सिर्फ 8,520. मतलब सिर्फ 17 फीसदी ही काम हुआ.
सवाल यह है कि जब 50 हजार पौधों का बजट पास हुआ, नर्सरी से पौधे खरीदे गए, मजदूरी निकली, डीजलपैट्रोल का बिल बना लेकिन जमीन पर पौधे ही नहीं लगे तो पैसा किस की जेब में गया? अगर 41 हजार पौधे खुद चल कर कहीं दूर निकल गए तो अलग बात है और अगर भ्रष्टाचार हुआ तो न अधिकारी पर कार्रवाई हुई और न ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया गया. ऐसे में 41 हजार पौधों का हिसाब कौन देगा? एक तरफ सरकार ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान चलाती है, दूसरी तरफ अपने ही टारगेट का 83 फीसदी हड़प जाती है. ऐसे नाजुक वक्त में जब बारिश कम हो रही है और गरमी बढ़ रही है तब भले ही खुले में पेड़ नजर न आएं लेकिन सरकारी फाइलों में तो जंगल लहलहा ही रहे हैं. Missing Trees
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