Indian Politics: जैसे नरेंद्र मोदी ने 10 जून को प्रधानमंत्री होने के 12वें साल को बड़े जोरशोर से ढोल पीटपीट कर मनाया वैसे ही लगभग उन्हीं के जैसे दुनिया के सब से समृद्ध व शक्तिशाली देश अमेरिका ने अपनी स्वतंत्रता के 250 साल 4 जुलाई को मनाया. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने देश के बारे में बड़े कसीदे काढ़े और यह साबित करने की पूरी कोशिश की कि 250 साल पहले भी वे ही थे जिन्होंने ब्रिटिश क्राउन से आजादी दिलाई थी.
अमेरिका आज भी सब से ताकतवर है, सब से अमीर है, प्रतिव्यक्ति आए नंबर एक नहीं है तो भी ऊपरी बड़े 10 देशों में है. पर यह दिख रहा है कि डोनाल्ड ट्रंप सरीखों से अमेरिका में स्वतंत्रताओं को ही नहीं, आर्थिक उपलब्धियों को भी ग्रहण लग सकता है. अमेरिका का अमीर, प्रभावशाली, हाईटैक कंपनियों का मालिक वर्ग और उन के साथ लाखों गरीब गोरे भी आज चर्च को आखिरी शरण मानने लगे हैं. अमेरिका में जो व्यक्तिगत स्वतंत्रताओं को जगह मिली थी, वह धीरेधीरे छिन रही है.
जिस अमेरिका ने 150 साल पहले अपने ही एक हिस्से में नीग्रो को गुलामी से आजादी दिलाने की लड़ाई लड़ी थी और जिस सिविल वार में अब्राहम लिंकन ने अमेरिका को दांव पर लगाया वह आज सैकड़ों आंतरिक फौल्टलाइनों में फंसता जा रहा है. भारत के आरएसएस की तरह का ‘मागा’ ग्रुप आज अमेरिका की सोच पर कब्जा कर चुका है. अमेरिका बड़ा चर्च था क्योंकि 250 साल पहले जब नई तकनीक जन्म लेने लगी थी, यूरोप के उन गोरों ने अमेरिका में बंजर पड़ी जमीन को आबाद किया था जिन्हें यूरोप के चर्च से चल रहे देशों में घुटन महसूस हो रही थी. अमेरिका में चर्च वे अपने साथ लाए थे पर चर्च के साथ तब राजा या सरकार नहीं थी.
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