फुटबौल की खुमारी पूरे शबाब पर है और फीफा विश्वकप की मेजबानी इस बार रूस के हाथों में है. लेनिन के देश में 15 जुलाई तक चलने वाले फीफा फुटबौल विश्वकप के लिए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन कोई 2-3 अरब डौलर नहीं बल्कि तकरीबन 12 अरब अमेरिकी डौलर खर्च कर रहे हैं. माना जा रहा है कि फीफा के बहाने पुतिन रूस की बदहाली को छिपा कर देश की ब्रैंडिंग करना चाहते हैं. इस के पीछे की वजह यही समझ में आती है कि रूस कम्युनिज्म की असफलता को फुटबौल से जोड़ने की कोशिश कर रहा है. 70-80 के दशक तक कार्लमार्क्स और लेनिन की विचारधारा पूरी दुनिया में पूछी जाने लगी थी.

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