5 बार की विश्व चैंपियन एम सी मैरीकौम ने एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में 48 किलो भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीत कर इतिहास रच दिया. 35 वर्षीय मैरीकौम ने अपनी उत्तर कोरियाई प्रतिद्वंद्वी किम ह्यांग मी को 5-0 से हरा कर यह पदक जीता.

एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में भारत को 1 स्वर्ण, 1 रजत और 5 कांस्य पदक मिले. मैरीकौम ने तकरीबन 1 साल बाद बौक्ंिसग रिंग में वापसी की है.

3 बच्चों की मां मैरीकौम ने साबित कर दिया कि मन में लगन हो तो कुछ भी हासिल करना मुश्किल नहीं है. मैरीकौम राज्यसभा सांसद भी हैं.

मैरीकौम का मानना है कि व्यस्त कार्यक्रम के बीच सक्रिय मुक्केबाज और सांसद के रूप में काम करना आसान काम नहीं है. दोनों ही काम थकाने वाले हैं. हर काम को अच्छी तरह से मैनेज करना सब के बूते की बात नहीं है, लेकिन मैरीकौम संसद से ले कर चूल्हाचौका और अपने बच्चों की देखभाल पूरी तरह से करती हैं. यह बात उन्होंने खुद स्वीकार की है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाली मैरीकौम की जिंदगी संघर्षों से भरी रही है. मैरीकौम साधारण परिवार से हैं. गांव की सीधीसादी गोरी लड़की मैरीकौम खेल की शुरुआत में छोटेछोटे सपोर्ट के लिए तरसी हैं. उन के पिता भी नहीं चाहते थे कि वे बौक्सर बनें. उन्हें लगता था कि उन का लुक्स खराब हो जाएगा. पर मैरीकौम ने हार नहीं मानी और जब उन्हें मैडल्स मिलने लगे तो सब की बोलती बंद हो गई.

मैरीकौम बौक्ंिसग अकैडमी भी चलाती हैं. वह इसलिए कि वे नहीं चाहतीं कि किसी भी गरीब बच्चे को पैसों या बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़े. वे ज्यादातर लड़कियों को बौक्ंिसग के क्षेत्र में लाना चाहती हैं ताकि बेटियां आगे बढें और देश का नाम रोशन करें.

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