शतरंज जगत में अपने प्रभाव को बढ़ाते हुए नार्वे के मैगनस कार्लसन ने रूसी प्रतिद्वंद्वी सर्गेई कारयाकिन को टाईब्रेकर में हराकर विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीता.

इस जीत के साथ कार्लसन शतरंज के दिग्गज खिलाड़ी गैरी कास्पोरोव जैसा दर्जा पाने के और करीब पहुंच गए. कास्पोरोव ने 15 वर्षों तक अपना दबदबा कायम रखा था. हालांकि, कारयाकिन ने 12 नियमित दौर तक कार्लसन को जोरदार टक्कर दी.

26 साल के दोनों युवा खिलाड़ियों के बीच हुए 12 मुकाबलों में कोई विजेता नहीं बन सका था. अंतिम चरण की चार अतिरिक्त बाजियों में नार्वे के चैंपियन कार्लसन ने कारयाकिन को 3-1 से शिकस्त देकर खिताबी जीत हासिल की.

कार्लसन को पहली बाजी जीतने के बाद दूसरी में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने जबर्दस्त वापसी करते हुए तीसरी और चौथी बाजी में लगातार जीत दर्ज कर खिताब पर अपना कब्जा जमाया.

26 वर्षीय कार्लसन ने इससे पहले 2013 और 2014 में भारत के विश्वनाथन आनंद को हराकर यह खिताब जीता था.

इस साल विश्व शतरंज चैम्पियनशिप की ईनामी राशि 11 लाख डालर है जिसमें से 60 फीसदी अवॉर्ड के रूप में दी जाएगी. कार्लसन के समर्थकों ने उन्हें इस मौके पर बधाई दी.

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