सिडनी की बरसात ने औस्ट्रेलिया की और ज्यादा फजीहत होने से बचा लिया वरना जिस तरह से चौथे और आखिरी टैस्ट मैच में भारत के गेंदबाज अपने रंगढंग दिखा रहे थे उस से तो यह सीरीज भारत की झोली में 3-1 से आ जाती. लेकिन कुछ भी कहें इतिहास तो अब रचा जा चुका है.

सोमवार, 7 जनवरी को सिडनी टैस्ट मैच के 5वें दिन जब बरसात के चलते अंपायरों ने मैच खत्म करने का फैसला लिया तो इस के साथ ही भारत ने 4 टैस्ट मैचों की सीरीज पर 2-1 से कब्जा कर लिया. यह जीत इसलिए ऐतिहासिक कहलाई जाएगी क्योंकि साल 1947 से लगातार औस्ट्रेलिया का दौरा कर रही भारतीय टीम वहां आज तक कोई भी टैस्ट सीरीज नहीं जीत पाई थी.

सिडनी वाले आखिरी टैस्ट मैच की बात करें तो भारत ने अपनी पहली पारी में चेतेश्वर पुजारा और ऋषभ पंत के शतकों की मदद से 7 विकेट पर 622 रन बना कर पारी को घोषित कर दिया था. इस के बाद फिरकी गेंदबाज कुलदीप यादव के 5 विकेटों की बदौलत भारत ने औस्ट्रेलिया को उस की पहली पारी में 300 रनों पर समेट दिया था. नतीजतन, भारत ने 322 रनों की बढ़त के साथ औस्ट्रेलिया को फौलोआन दिया, लेकिन उस के बाद मौसम के बिगड़े मिजाज ने मेजबान टीम को इतनी राहत तो दिला ही दी कि यह मैच बिना किसी नतीजे का रहा. सिडनी में बारिश के चलते मैच के चौथे दिन के 2 सैशन और आखिरी दिन पूरी तरह बारिश की भेंट चढ़ गया.

इस सीरीज की शुरुआत 6 दिसंबर, 2018 से एडिलेड में हुई थी जहां भारत ने मेजबान टीम को 31 रनों से मात दी थी, जबकि इस सीरीज का दूसरा टैस्ट मैच पर्थ में खेला गया था. वहां औस्ट्रेलिया ने भारत को 146 रनों से हारते हुए सीरीज को 1-1 से बराबर कर दिया था. मेलबर्न में खेले गए तीसरे ‘बौक्सिंग डे’ टैस्ट मैच  में भारत ने एक बार फिर वापसी की और औस्ट्रेलिया को 137 रनों  से हरा कर सीरीज में 2-1 से बढ़त  हासिल कर ली. सिडनी मैच का नतीजा तो आप को पता ही है.

इस जीत पर भारत के कप्तान विराट कोहली ने कहा, ”सब से पहले मैं यह कहना चाहता हूं कि टीम का हिस्सा बनते हुए मुझे इस से ज्यादा खुशी कभी नहीं हुई. मैं ने यहीं पहली बार कप्तानी की थी और आज यहां हम इस मुकाम पर पहुंचे हैं. मुझे यकीन नहीं हो रहा है कि 4 साल बाद हम यहां टैस्ट सीरीज जीते हैं. मैं सिर्फ एक शब्द कहना चाहता हूं, ‘प्राउड’. इस टीम की कप्तानी करते हुए मुझे गर्व है और मैं खुद को खुशकिस्मत समझता हूं. खिलाड़ी अपने कप्तान को बेहतर दिखाते हैं…

‘यह मेरे कैरियर की सब से बड़ी उपलब्धि है. जब साल 2011 में हम वर्ल्ड कप जीते थे तो मैं टीम का सब से युवा सदस्य था. मैं ने सब को वहां भावुक होते देखा था. मुझे वहां वह अहसास नहीं हुआ. अब यहां 3 बार आने के बाद मैं कह सकता हूं यह सीरीज जीतना मेरे लिए कुछ अलग है. हम वह हासिल करने में कामयाब रहे हैं जिस पर गर्व कर सकते हैं.”

विराट कोहली ने इस मौके पर अपनी टीम के साथी खिलाड़ियों की खूब तारीफ की. उन्होंने खासतौर पर चेतेश्वर पुजारा की खूब तारीफ करते हुए कहा, ” मैं पुजारा का नाम खास लेना चाहूंगा. वे सीरीज मे शानदार खेले.”

वैसे, विराट कोहली थोड़े निराश भी दिखे और उन्होंने कहा भी कि वे यह सीरीज 2-1 की जगह 3-1 से जीतना चाहते थे पर बारिश और खराब रोशनी की वजह से ऐसा नहीं हो सका क्योंकि  मौसम पर किसी का बस नहीं चलता.

अगर इतिहास कि बात करें तो भारतीय टीम ने औस्ट्रेलिया में जा कर 13 बार टैस्ट मैच की सीरीज खेली है, जिस में से सिर्फ 3 बार ही 1980-81, 1985-86 और 2003-04 में वह अपनी सीरीज को ड्रा करने में कामयाब रही है. अब जा कर उसे यह शानदार जीत मिली है.

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