Satirical Story In Hindi :

फिल्म ‘टौयलेट: एक प्रेमकथा’ के हीरो अक्षय कुमार हैं, जबकि टौयलेट: एक घोर व्यथा के हीरो हैं बेचारेलाल.

भले ही बेचारेलाल को ले कर कोई फिल्म न बनी हो, पर आप थोड़ा सब्र कर के उन की परेशानी को उन की जगह खुद को रख कर जानने की कोशिश करें, तो एक अनदेखी फिल्म देख पाएंगे. बेचारेलाल की बेचारगी यह है कि जिस तरह हर पल सांस लेना जरूरी है, उसी तरह उन के लिए हर आधे घंटे में मूत्र विसर्जन करना जरूरी है.

बचपन से ले कर किशोर होने तक बेचारेलाल बिस्तर ही गीला करते रहे. डाक्टरों से सलाह करने पर उन्होंने बताया कि उन का मूत्राशय छोटा है, इस वजह से यह समस्या है. बड़े होने पर उन्हें लगा कि अब तो उन के साथसाथ मूत्राशय भी बड़ा हो गया होगा, सो फिर उन्होंने डाक्टर से पूछा.

इस बीच तकनीक काफी तरक्की कर चुकी थी और डाक्टरों ने जांच कर के बताया कि प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने के चलते उन के साथ यह समस्या है.

बाद में बिस्तर गीला करने की आदत तो छूटी, पर अभी भी हर आधे घंटे पर सूसू की तलब ठीक वैसे उठती है, जैसे नेताओं को कुरसी की तलब हर 5 साल में होती है.

छोटी जगहों पर यह आदत कोई समस्या नहीं, क्योंकि उन के लिए जगह ही जगह होती है. ‘धरती मेरी माता पिता आसमां...’ गाते हुए वे कहीं भी शुरू हो जाते थे, पर बड़ेबड़े शहरों में छोटीछोटी समस्याएं भी बड़ी हो जाती हैं और बड़ा शहर भी ऐसावैसा नहीं बंबई नगरिया, जो अब मुंबई के नाम से जाना जाता है. इस के बारे में गाने भी बने हैं, ‘ये जो बंबई शहर हादसों का शहर है’ और ‘ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां...’ वगैरह.

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