Women's Freedom: आज की दुनिया में युवतियां परंपराओं के साथ नहीं, एजुकेशन के साथ खड़ी हैं जिस से पितृसत्ता की पुरानी बंदिशें टूट रही हैं. आज की शिक्षित औरतें कैरियर के जरिए अपना समय बदल रही हैं. अपनी काबिलीयत और मेहनत के दम पर वे हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं और गुलामी के बंधनों को तोड़ रही हैं लेकिन फिर भी, पितृसत्ता की कुछ जंजीरें औरतों के पैरों में कस कर बंधी हुई हैं जिन्हें तोड़े बिना पैट्रियार्की पूरी तरह खत्म नहीं होगी.

मां बनने का गुण नेचर ने औरतों को दिया है लेकिन इस नैचुरल गुण की वजह से ही औरत हर युग में और हर समाज में मर्दों की निजी संपत्ति बनी रही. समाज कहता है कि औरत मां बनने के बाद ही पूर्ण होती है लेकिन क्या यह पूर्णता वाकई आजादी है या सिर्फ गुलामी का एक तरीका?

इस समस्या का हल एंटीनाटालिज्म की विचारधारा में है. यह संतान न पैदा करने की दार्शनिक और सामाजिक विचारधारा है. यह धर्म से जुड़ी पितृसत्ता की गुलामी को तोड़ने का सब से तर्कसंगत और सब से क्रांतिकारी रास्ता है. एंटीनाटालिज्म कोई नकारात्मक विचार नहीं बल्कि औरतों को उन के शरीर, समय, सपनों और जीवन पर खुद के कंट्रोल का एक नायाब उपाय है. यह न भूलें कि पितृसत्ता धार्मिक रीतिरिवाजों, प्रवचनों, परंपराओं के माध्यम से थोपी जाती है. हर गांव, कसबा, शहर के महल्ले में चारपांच पंडितों का काम यही होता है कि वे घरघर की पूरी जानकारी रखें और घर में भी कोई युवक अपनी युवा पत्नी को कंट्रोल नहीं करता तो उसे बाहर बारबार बीवी का गुलाम कह कर बदनाम किया जाता है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...