Rampura Kanwarpura School: 21 अगस्त को सीजेपी की टीम अपने स्कूल ठीक करो अभियान के तहत रामपुरा कंवरपुरा गांव के एक सरकारी स्कूल को देखने गई थी. रास्ते में ट्रैक्टर ट्रॉली से बैरिकेडिंग की गई थी. बाहर से आने वाली गाड़ियों की चेकिंग हो रही थी. सुबह 8 बजे जैसे ही कार्यकर्ता पहुंचे भीड़ ने टीम को घेर लिया. धक्का मुक्की हुई. गाली गलौज हुई. मारपीट हुई. सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका ने खुद वीडियो डाल कर कहा कि शर्ट फाड़ी गई. मोबाइल तोड़ा गया. गाड़ियों के शीशे फोड़े गए. एक कार्यकर्ता पीछे रह गया तो उसे पटक कर पीटा गया. ग्रामीणों ने कहा कि ये बाहरी लोग हैं. राजनीतिक रंग दे रहे हैं. हम खुद ठीक करा लेंगे. सवाल सीधा है. अगर खुद ही ठीक कराना था तो बच्चे आज भी तबेले में क्यों पढ़ रहे हैं? कोई आपकी बदहाली दिखाने आ रहा है तो आप उसे पीट क्यों रहे हैं?

रामपुरा कंवरपुरा गांव की कहानी पूरे राजस्थान की कहानी है साथ ही यह पूरे देश की हकीकत भी है. रामपुरा के सरकारी प्राइमरी स्कूल की छत की पट्टियां टूट चुकी हैं. नीचे लोहे के एंगल लगा कर छत को गिरने से रोका गया है. पूरी इमारत को डेंजर बता कर बंद कर दिया गया है. बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ रहे हैं. उनको 50 मीटर दूर भैंस के बाड़े में टीन शेड के नीचे बैठाया जा रहा है. बगल में पशुओं का चारा पड़ा है. दीवार की ईंटें गिरी हुई हैं. ग्रामीण खुद कह रहे हैं कि 12 लाख 50 हजार का बजट पास हो चुका है लेकिन महीनों से काम शुरू नहीं हुआ है. उसी गांव में भागवत कथा और प्राण प्रतिष्ठा का बड़ा उत्सव चल रहा है. 551 कलश के साथ यात्रा निकाली जा रही है. नया मंदिर चमचमाता हुआ बन गया है. स्कूल के लिए पैसा नहीं है पर मंदिर के लिए लाखों हैं. ये इत्तेफाक नहीं है. ये नीति है.

आगे की कहानी पढ़ने के लिए सब्सक्राइब करें

डिजिटल

(1 साल)
USD99USD49
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
 

डिजिटल + 24 प्रिंट मैगजीन

(1 साल)
USD150USD129
 
सब्सक्राइब करें

सरिता सब्सक्रिप्शन से जुड़ेें और पाएं

  • सरिता मैगजीन का सारा कंटेंट
  • देश विदेश के राजनैतिक मुद्दे
  • 7000 से ज्यादा कहानियां
  • समाजिक समस्याओं पर चोट करते लेख
  • 24 प्रिंट मैगजीन
और कहानियां पढ़ने के लिए क्लिक करें...