Gen Alpha Protest: देश भर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले जेन एल्फा बच्चे सिर्फ शिक्षकों और सुविधाओं की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने भविष्य की गारंटी मांग रहे हैं. उनके हाथों में उठे सवालों की गूंज उन मांओं तक भी पहुंच रही है, जो वर्षों से घर की चारदीवारी में अपनी आवाज दबाकर जीती आई हैं. बच्चों का ‘क्यों’ अब मांओं के भीतर दबे सवालों को जगा रहा है. शिक्षा, बराबरी, सम्मान और अपने फैसले लेने की आजादी का सवाल, सामंती मानसिकता वाली सरकार को डराने लगा है और ‘स्कूल ठीक करो’ की लड़ाई धीरे-धीरे ‘समाज ठीक करो’ और मांओं की मुक्ति की लड़ाई में बदलती दिखाई दे रही है.

लखनऊ से मेरठ वाली आवाज उठी

लखनऊ में मोहान रोड स्थित जय प्रकाश नारायण सर्वोदय स्कूल की करीब 300 छात्राओं ने 17 अगस्त को स्कूल की चारदीवारी फांदी और सड़क पर ह्यूमन चेन बनाकर शहर का चक्का जाम कर दिया. तेज बारिश के बीच करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर इन छात्राओं ने दुबग्गा-कानपुर बाईपास पर वाहनों की आवाजाही रोक दी और मुख्यमंत्री आवास की ओर जाने की कोशिश की. उनकी मांग थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हमारे स्कूल में लेकर आओ और वहां की दुर्दशा दिखाओ. ऐसी ही आवाज 1857 में मंगल पांडेय ने उठाई थी. चाहे वहां मकसद कुछ और था.

यह कोई सामान्य छात्र आंदोलन नहीं था. यह उन बच्चों की आवाज थी, जिन्हें यह महसूस हो गया है कि अगर वे चुप रहे तो उनकी पढ़ाई, उनका भविष्य और उनके सपने भी उसी स्कूल की टूटी दीवारों, खाली कक्षाओं और गायब शिक्षकों के नीचे दब कर खत्म हो जाएंगे.

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