Backward Class Education: नेताजी सुभाष चंद्र बोस महाविद्यालय लखनऊ का सब से अच्छा कालेज है. यहां पढ़ने आने वाली लड़कियों में बड़ी संख्या स्कूटी से आने वाली लड़कियों की है. करीब 1,200 लड़कियां यहां पढ़ने आती हैं जिन्हें देख कर अंदाजा लगाना आसान है कि लड़कियों में ओबीसी जातियों की संख्या अधिक है. ये सांवले रंग की साधारण सी दिखने वाली होती हैं.

1980 के दशक से तुलना करें तो ओबीसी लड़कियों की संख्या तेजी से बढ़ी है. पहले लड़कियां साइकिल से अधिक आती थीं या फिर उन के परिवार का कोई सदस्य कालेज छोड़ने आता था. ओबीसी की लड़कियां अधिक से अधिक कक्षा 10 या 12 तक पढ़ती थीं. इस के बाद उन की शादी कर दी जाती थी. अब स्कूल ही नहीं, कालेज में भी लड़कियों की संख्या बढ़ी है. ओबीसी लड़के भी अब पहले से अधिक पढ़ रहे हैं. पढ़नेलिखने के बाद भी नौकरियों में इन की संख्या उस अनुपात में नहीं दिखती. नौकरियों में ओबीसी उस अनुपात में नहीं पहुंच पा रहे हैं जिस तरह से उन की पढ़ने वालों की संख्या बढ़ी है.

1990 में जब मंडल कमीशन लागू हुआ तो ओबीसी को आगे बढ़ने का मौका मिला. मंडल कमीशन लागू होने से अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 27 फीसदी का आरक्षण मिला. इस से उन की सामाजिक व आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ. इस ने पिछड़ी जातियों में राजनीतिक चेतना जगाई और उन्हें मंडल राजनीति के तहत सत्ता में मुख्यधारा का भागीदार बनाया, जिस से बिहार और यूपी जैसे राज्यों में राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल गया.

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