दृश्य-1

भोपाल के एक बड़े और पुराने मंदिर में भागवत कथा हो रही थी. प्रवेशद्वार के ठीक सामने महाराजजी और उन की मंडली संगीतमय भागवत वांच रही थी. कथावाचक महाराज के बारे में पहले ही काफी प्रचारप्रसार हो चुका था कि वे बहुत पहुंचे हुए हैं और कई बार उन का प्रभु से साक्षात्कार हो चुका है. लिहाजा, उन्हें किसी चीज की जरूरत नहीं. वे तो बस कलियुगी लोगों को तारने के लिए धर्म का काम करते हैं.

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