शाम 6 बजते ही जहां सब को घर निकलने की जल्दी होती थी, वहीं संतोष पूरी तसल्ली से अपने कंप्यूटर में सिर घुसाए बैठे रहते थे. काम भी ऐसा ज्यादा नहीं था कि औफिस टाइम में खत्म न हो, उन की पत्नी का कहना है कि वे कभी 9 बजे से पहले घर पहुंचते ही नहीं हैं.संतोष का घर जाने का जैसे मन ही नहीं करता, वे 9 बजे तक वहां क्या करते हैं, वही जानें.

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