29अक्तूबर, 2018 को सुबह के करीब 8 बजे थे. तभी रोहिणी जिले के थाना बवाना के ड्यूटी अफसर हैडकांस्टेबल जितेंद्र कुमार मीणा को सूचना मिली कि दरियापुर-बवाना रोड पर वर्मी कंपोस्ट पोली फार्म के पास एक महिला को किसी ने गोली मार दी है. महिला स्कूटी से जा रही थी.

ड्यूटी अफसर ने इस सूचना से इंसपेक्टर राकेश कुमार को अवगत करा दिया. इंसपेक्टर राकेश कुमार तुरंत एएसआई राजेश कुमार, कांस्टेबल यशपाल, अनिकेत आदि को ले कर घटनास्थल की ओर रवाना हो गए.

घटनास्थल थाने से पश्चिम दिशा में करीब 3 किलोमीटर दूर था, इसलिए वह जल्द ही वहां पहुंच गए. उन्हें वर्मी कंपोस्ट पोली फार्म के सामने सड़क पर सफेद रंग की स्कूटी नंबर डीएल 11 एसपी 7044 पड़ी मिली, जिस में चाबी लगी हुई थी.

वहीं पर 2 लेडीज बैग, एक हेलमेट और एक जोड़ी जूती पड़ी थी. पास में सड़क पर ही थोड़ा खून भी था और कारतूस का एक खोखा भी पड़ा था. आसपास के लोगों ने बताया कि एक महिला स्कूटी से जा रही थी, तभी किसी ने उसे गोली मार दी. कुछ लोग उसे महर्षि वाल्मीकि अस्पताल ले गए हैं.

कांस्टेबल यशपाल को घटनास्थल पर छोड़ कर इंसपेक्टर राकेश कुमार महर्षि वाल्मीकि अस्पताल चले गए. वहां उन्होंने डाक्टरों से बात की तो पता चला, उस महिला की मौत हो चुकी है. महिला कौन है और कहां रहती है. पुलिस के लिए यह जानना जरूरी था.

इस के लिए पुलिस ने घटनास्थल से मिले बैगों की तलाशी ली तो पता चला मृतका का नाम सुनीता है और वह बवाना के दादा भैया वाली गली के रहने वाले मंजीत की पत्नी है. वह सोनीपत के फिरोजपुर गांव में गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी गर्ल्स स्कूल में टीचर थीं. मृतका के बारे में जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने बवाना स्थित मृतका के ससुराल वालों को सूचना दे दी.

कुछ ही देर में मृतका का पति मंजीत और घर के अन्य लोग महर्षि वाल्मीकि अस्पताल पहुंच गए. उन्होंने जब वहां सुनीता की लाश देखी तो फफकफफक कर रोने लगे.

मृतका की शिनाख्त हो जाने के बाद इंसपेक्टर राकेश कुमार ने इस की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को दे दी और कांस्टेबल अनिकेत को अस्पताल में छोड़ कर वह फिर से घटनास्थल पर पहुंच गए.

सबूत जुटाने के लिए उन्होंने क्राइम इनवैस्टीगेशन टीम को भी घटनास्थल पर बुला लिया. कुछ ही देर में डीसीपी (रोहिणी) रजनीश गुप्ता भी घटनास्थल पर पहुंच गए. इस के बाद अस्पताल पहुंच कर उन्होंने मृतका  के ससुराल वालों से बात की.

मृतका के पति मंजीत ने बताया कि वह सोनीपत के एक सरकारी स्कूल में टीचर थी. रोजाना की तरह वह आज सुबह करीब 7 बजे अपनी स्कूटी से ड्यूटी के लिए निकली थी. पता नहीं किस ने उसे गोली मार दी. पूछताछ में मंजीत ने बताया कि उस की किसी से कोई दुश्मनी भी नहीं है.

माहौल गमगीन होने की वजह से उस समय उन्होंने मंजीत से ज्यादा पूछताछ करनी जरूरी नहीं समझी, लेकिन इतना तो वह जानते ही थे कि सुनीता की हत्या के पीछे कोई न कोई वजह जरूर रही होगी और वह आज नहीं तो कल जरूर सामने आ जाएगी.

इंसपेक्टर राकेश कुमार को कुछ निर्देश दे कर रजनीश गुप्ता वहां से चले गए. उन के जाने के बाद इंसपेक्टर राकेश कुमार ने मौके से बरामद सबूत अपने कब्जे में ले लिए और अज्ञात हत्यारों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर केस की जांच शुरू कर दी.

राकेश कुमार ने जांच की शुरुआत मृतका सुनीता की ससुराल से ही की. पति मंजीत ने बताया कि घर में वह वह नौर्मल रहती थी. किसी को भी उस से किसी तरह की शिकायत नहीं थी. वह स्कूटी से ही स्कूल आतीजाती थी. पुलिस ने मंजीत से सुनीता के मायके वालों का पता और फोन नंबर ले कर उन लोगों को बवाना थाने बुला लिया.

पुलिस को मिली महत्त्वपूर्ण जानकारी

सुनीता के मातापिता थाना बवाना पहुंच गए. उन्होंने बताया कि मंजीत सुनीता को अकसर परेशान करता रहता था. साथ ही यह भी कि मंजीत का किसी मौडल के साथ चक्कर चल रहा था, जो मुंबई में रहती है. सुनीता इस का विरोध करती थी तो वह सुनीता को प्रताडि़त करता था. इसी के चलते मंजीत सुनीता पर तलाक लेने का दबाव डाल रहा था. ये बातें उस ने मायके वालों को बताई थीं.

पुलिस के लिए यह जानकारी महत्त्वपूर्ण थी. लिहाजा पुलिस ने सुनीता के पति मंजीत के फोन की काल डिटेल्स निकलवाई. काल डिटेल्स से पता चला कि मंजीत की मुंबई के किसी फोन नंबर पर अकसर बातें होती थीं. जांच में वह नंबर एंजल गुप्ता का निकला. एंजल गुप्ता कोई आम लड़की नहीं थी बल्कि एक मशहूर मौडल थी और बौलीवुड की कई फिल्मों में काम कर चुकी थी.

काल डिटेल्स से केस की स्थिति साफ हो गई. साथ ही पुलिस को सुनीता के मातापिता के बयानों में भी सच्चाई नजर आने लगी. लिहाजा इंसपेक्टर राकेश कुमार ने मंजीत को पूछताछ के लिए थाने बुला लिया.

मंजीत से उस की पत्नी सुनीता के मर्डर के बारे में पूछताछ की गई तो पहले वह इधरउधर की बातें कर के पुलिस को गुमराह करने की कोशिश करता रहा, लेकिन सख्ती से पूछताछ की गई तो उस ने अपना अपराध न केवल स्वीकारा बल्कि उस की हत्या में शामिल रहे लोगों के नामों का भी खुलासा कर दिया.

उस से पूछताछ के बाद पता चला कि सुनीता की हत्या के मामले में मंजीत की प्रेमिका एंजल गुप्ता के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता का भी हाथ था.

राजीव ने ही भाड़े के हत्यारों से 10 लाख रुपए में सुनीता की हत्या का सौदा किया था. मंजीत से हुई पूछताछ के बाद सुनीता की हत्या की जो कहानी सामने आई, वह एक मौडल के प्यार की कहानी थी.

सीधीसादी जिंदगी थी सुनीता की

मूलरूप से हरियाणा की रहने वाली सुनीता का विवाह दिल्ली के बवाना में रहने वाले मंजीत के साथ हुआ था. मंजीत प्रौपर्टी डीलर था. सुनीता पति से ज्यादा पढ़ीलिखी थी, इस के बावजूद उस ने खुद को ससुराल में ढाल लिया था. पति की आर्थिक स्थिति भी मजबूत थी और उस का प्रौपर्टी का काम भी अच्छा चल रहा था. लिहाजा सुनीता को ससुराल में किसी तरह की परेशानी नहीं थी.

धीरेधीरे समय अपनी गति से बीतता रहा. सुनीता एक बेटी और एक बेटे की मां बन गई. फिलहाल उस की बेटी 16 साल की है और बेटा 12 साल का.

सुनीता सोनीपत के फिरोजपुर गांव स्थित गवर्नमेंट सीनियर सैकेंडरी गर्ल्स स्कूल में पढ़ाती थी. ससुराल बवाना से स्कूल की दूरी लगभग 20 किलोमीटर थी, इसलिए स्कूल आनेजाने के लिए सुनीता ने एक स्कूटी खरीद ली थी. उसी से वह स्कूल के लिए सुबह करीब 7 बजे घर से निकल जाती थी.

सुनीता अपने गृहस्थ जीवन से खुश थी, लेकिन 2 साल पहले उस की खुशियों में ग्रहण लगना शुरू हो गया था. दरअसल, दिल्ली की एक पार्टी में मंजीत की मुलाकात एंजल गुप्ता नाम की एक मौडल से हुई. एंजल गुप्ता बेहद खूबसूरत थी और बौलीवुड की कई फिल्मों में छोटामोटा काम कर चुकी थी.

जसवीर भाटी द्वारा निर्देशित फिल्म ‘भूरी’ के आइटम सांग ‘ओ मेरा झुमका..मेरा ठुमका बदनाम हो गया’ में भी एंजल गुप्ता ने अपने जलवे बिखेरे थे. वह एक्ट्रैस बनने की दौड़ में थी. एंजल गुप्ता का असली नाम शशिप्रभा था. बताया जाता है कि वह मूलरूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली थी.

उस की मां दिल्ली में सीपीडब्ल्यूडी में नौकरी करती है और आर.के. पुरम सेक्टर-4 के सरकारी क्वार्टर में रहती है. उस के पिता का देहांत काफी दिनों पहले हो चुका था. मौडलिंग के क्षेत्र में आने के बाद शशिप्रभा एंजल गुप्ता के नाम से जानी जाने लगी थी. एंजल गुप्ता कुछ दिनों तक तो दिल्ली में ही मौडलिंग करती रही, फिर मन में बौलीवुड के हसीन सपने ले कर मुंबई चली गई.

मुंबई जाने के लिए एंजल गुप्ता के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता ने उस की हर तरह से मदद की. मुंबई में एंजल ने जो फ्लैट किराए पर लिया था, उस का हर महीने का किराया 50 हजार रुपए था, जो राजीव ही देता था. मुंबई जा कर एंजल फिल्मों में काम पाने के लिए संघर्ष करने लगी. उस की मेहनत रंग लाई और उसे कुछ फिल्मों में काम मिल गया. इस के बाद वह और ऊंचाई पर पहुंचने के सपने देखने लगी.

एंजल के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता दिल्ली रोहिणी सैक्टर-3 में रहते थे. वह एक बिजनैसमैन हैं और दक्षिणी दिल्ली में उन के रेस्तरां और होटल हैं. वह एंजल गुप्ता को हर तरह से सपोर्ट करते थे.

आकर्षक कदकाठी वाला मंजीत पहली मुलाकात में ही एंजल का दीवाना हो गया था. पार्टी में मिलने के बाद से एंजल और मंजीत की फोन पर बातें होने लगीं. धीरेधीरे एंजल का झुकाव भी मंजीत की तरफ हो गया. समयसमय पर दोनों की मुलाकातें भी होने लगीं, जिस से दोनों और नजदीक आते गए.

धीरेधीरे दोनों के संबंध इस स्थिति तक पहुंच गए कि वह शादी करने की सोचने लगे थे. लेकिन इस में सब से बड़ी समस्या मंजीत की पत्नी सुनीता थी. अपनी ब्याहता के रहते हुए एंजल से शादी नहीं कर सकता था.

सुनीता को पता चली हकीकत

पति पर आंखें मूंद कर विश्वास करने वाली सुनीता इस बात से काफी दिनों तक तो अंजान रही. बाद में जब मंजीत ने उसे मानसिक रूप से परेशान करना शुरू किया तब भी वह कुछ नहीं समझ पाई. उस की समझ नहीं आया कि अचानक मंजीत में यह बदलाव कैसे आ गया. सुनीता ने कई बार मंजीत को फोन पर बात करते देखा. फोन पर हो रही बातचीत सुनने के बाद सुनीता समझ गई कि मंजीत का जरूर किसी लड़की से चक्कर चल रहा है.

अंतत: जैसेतैसे सुनीता यह पता लगाने में सफल हो गई कि मुंबई में रहने वाली एक मौडल से मंजीत के प्रेमिल संबंध हैं. सुनीता ने इस बारे में मंजीत से पूछा तो पहले तो वह इस बात को टालने की कोशिश करता रहा लेकिन फिर बोला, ‘‘अगर तुम्हारे मन में इस तरह का कोई शक हो गया है तो मुझ से तलाक ले लो.’’

‘‘नहीं, मैं न तो तलाक नहीं दूंगी और नहीं लूंगी, तुम्हें उस लड़की से बात भी बंद करनी होगी.’’

सुनीता के इतना कहते ही मंजीत ने उसे खूब खरीखोटी सुनाई. सुनीता समझ नहीं पा रही थी कि अपने घर को कैसे संभाले. विपरीत हालातों में मन को शांत रखने के लिए वह रोजमर्रा की डेली डायरी लिखती थी. तनाव की बातें वह डायरी में लिख देती थी. जब वह ज्यादा परेशान होती तो मायके में बात कर के अपना मन हलका कर लेती थी.

मायके वालों ने भी मंजीत को बहुत समझाया लेकिन वह एंजल गुप्ता के प्यार में अंधा हो चुका था इसलिए किसी के समझाने का उस पर कोई असर नहीं हुआ. नतीजा यह निकला कि मंजीत और उस के ससुराल वालों के बीच छत्तीस का आंकड़ा बन गया.

बताया जाता है कि एंजल मंजीत पर शादी करने का दबाव बना रही थी. इस बारे में उस ने अपने मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता से बात की. राजीव ने उसे भरोसा दिया कि वह उस की शादी मंजीत से कराने में पूरी मदद करेगा.

मई, 2017 में सुनीता और एंजल के बीच फोन पर तीखी नोंकझोंक हुई, जिस में सुनीता ने एंजल को गुस्से में काफी कुछ कह दिया. बताया जाता है कि तब एंजल ने उसे अंजाम भुगतने की धमकी भी दी थी.

एंजल सुनीता द्वारा की गई इस बेइज्जती का बदला लेना चाहती थी, इसलिए उस ने बढ़ाचढ़ा कर यह बात मंजीत को बताई ताकि वह सुनीता पर भड़के. उस ने साफ कह दिया कि वह ऐसा अपमान बरदाश्त नहीं कर सकती. अगर मुझे चाहते हो तो या तो सुनीता को तलाक दो या फिर बेइज्जती का बदला लो.

इस बात को ले कर एंजल, राजीव और मंजीत ने एक मीटिंग की. बताया जाता है कि इस मीटिंग में राजीव ने सुनीता को ठिकाने लगाने में 10 लाख रुपए खर्च करने को कह दिया. मंजीत इस के लिए तैयार हो गया. क्योंकि सुनीता तलाक देने को राजी नहीं थी, उस के पास उसे ठिकाने लगाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं था.

राजीव जानता था कि उस के ड्राइवर दीपक के बदमाशों से संबंध हैं, इसलिए उस ने दीपक से सुनीता की हत्या के बारे में बात की. दीपक 10 लाख रुपए में यह काम कराने को तैयार हो गया. राजीव ने बतौर एडवांस उसे ढाई लाख रुपए दे दिए. दीपक ने मेरठ के रहने वाले शहजाद सैफी उर्फ कालू, धर्मेंद्र और विशाल उर्फ जौनी से बात की.

शूटर पहुंच गए दिल्ली

योजना को अंजाम देने के लिए 25 अक्तूबर, 2018 को राजीव गुप्ता, दीपक, धर्मेंद्र, शहजाद और विशाल बवाना पहुंचे. लेकिन तब तक सुनीता स्कूल के लिए निकल चुकी थी. 27 अक्तूबर को करवाचौथ का त्यौहार था. एकतरफ मंजीत जिस पत्नी की हत्या के तानेबाने बुन रहा था, तो पत्नी इस सब से अनभिज्ञ पति की लंबी आयु की कामना के लिए करवाचौथ का व्रत रखे हुए थी.

किराए के जो बदमाश बाहर से दिल्ली आए हुए थे, वह खाली हाथ अपने घर नहीं लौटना चाहते थे. लिहाजा उन्होंने हजरत निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन के पास किराए का एक कमरा ले लिया. साथ ही सुनीता को स्कूल जाते वक्त उस की हत्या करने की योजना बना ली.

योजना के अनुसार, 29 अक्तूबर को अलसुबह राजीव गुप्ता अपनी डस्टर कार संख्या डीएल8सी जेड4306 से बदमाशों को हजरत निजामुद्दीन से बवाना ले गया. सुनीता किसी भी हालत में न बच पाए, इस के मद्देनजर दीपक और धर्मेंद्र वर्मी कंपोस्ट फार्म, दरियापुर के पास पोजीशन ले कर खड़े हो गए. जबकि शहजाद और विशाल गांव बवाना में राजीव गांधी स्टेडियम के पास बाइक ले कर खडे़ हो गए. उन के हाथों में .315 बोर के तमंचे थे.

सुबह 7 बजे के करीब सुनीता अपनी स्कूटी से जैसे ही स्कूल के लिए निकली तो उस के पति मंजीत ने इंतजार कर रहे बदमाशों को मिस्ड काल दी. यह उन के लिए एक इशारा था. इशारा पाते ही बदमाश सतर्क हो गए. तभी राजीव गुप्ता वहां से चला गया. उधर सुनीता घर से करीब 7 किलोमीटर दूर दरियापुर गांव के नजदीक पहुंची तो वहां घात लगाए बदमाशों ने सुनीता पर फायर कर दिया.

उस समय करीब साढ़े 7 बजे थे. गोलियां लगते ही सुनीता गिर गई. वह सड़क पर तड़प रही थी, तभी उधर से गुजर रहे लोगों ने उसे महर्षि वाल्मीकि अस्पताल पहुंचाया, जहां डाक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. पता चला कि सुनीता के सीने पर 3 गोलियां मारी गई थीं.

मंजीत से पूछताछ के बाद उस के घर की तलाशी ली गई तो पुलिस को सुनीता की पर्सनल डायरी मिली, जिस में उस ने काफी कुछ लिखा था. मंजीत की निशानदेही पर पुलिस ने प्रेमिका एंजल गुप्ता उर्फ शशिप्रभा व उस के मुंहबोले पिता राजीव गुप्ता को भी गिरफ्तार कर लिया.

पुलिस ने एंजल गुप्ता की निशानदेही पर मयूर विहार में रहने वाली उस की मौसी के घर से 2 मोबाइल फोन भी बरामद किए, जिन का इस्तेमाल वारदात में हुआ था. इन तीनों को गिरफ्तार कर पुलिस ने न्यायालय में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया.

इस के बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने वारदात में शामिल रहे दीपक और शहजाद सैफी उर्फ कालू को गिरफ्तार कर लिया. इन दोनों ने भी पुलिस के सामने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया. पुलिस ने इन दोनों को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया. कथा लिखे जाने तक धर्मेंद्र और विशाल पुलिस की पकड़ में नहीं आए थे.

  कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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