धार्मिक हिंसा जोरू और जमीन के लिए की गई हिंसा से कई गुना अधिक होती है. हम जिस सर्वधर्म समभाव या धार्मिक सहिष्णुता की बात करते हैं, वह मिथ्या के अलावा कुछ नहीं. प्रस्तुत है, मोहन वर्मा की विवेचना.

प्रागैतिहासिक मनुष्य ने अस्तित्व के लिए संघर्ष का एक लंबे समय तक सामना बर्बरतापूर्वक लड़ कर अपना बचाव कर किया. उस के  लिए हर तरह के शत्रु को समाप्त करना जरूरी था, वरना शत्रु उसे समाप्त कर देता.

Tags:
COMMENT