सड़क पर जा रहे हो और अचानक सामने से कोई लड़की आती दिख जाए टाइट कपड़ों में, तो उसके पूरे बदन का एक्स-रे करने में हमें देर नहीं लगती. स्कूल कॉलेज में सीढ़ियों के नीचे खड़े होकर उतरती हुई लड़कियों के स्कर्ट के भीतर ताकना, बस ट्रेन में किसी लड़की का अगर कोई अंग दिख जाए तो बगल वाले को कोहनी मार कर दिखाना.

डिस्को, पब में छोटे कपडे पहनी हुयी लड़की के वक्ष स्थल को घूरना और ऐसा दिखाना की कहीं और ध्यान है. कहीं कुछ उठाते हुए किसी लड़की की कमर या पैंटी लाइन दिख जाने पर आहे भरना.

क्लीवेज से लेकर कमर, चेहरा, पीठ या पेट और गर्दन कुछ भी नज़र आ जाये या अगर नज़र ना भी आ रहा हो तो भी चीर देने वाली नज़रों से देखने की कोशिश करना.

ये सब तरीके है बिना कुछ बोले, बिना कुछ किये किसी भी लड़की को परेशान करने के और इन सब में सबसे बड़ी बात की आसानी से जवाब देकर निकल जाओ कि मेरा ध्यान कहीं और था या फिर दिख रहा था तो देख लिया, कौनसा रेप कर दिया.

ये सब कारनामे सिर्फ सड़कछाप मजनुओं के नहीं, बल्कि हर एक मर्द के हैं. चाहे वो कितने भी प्रतिष्ठित घर का हो या कितने बड़े स्कूल कॉलेज का विद्यार्थी या फिर किसी बड़ी कंपनी में काम करने वाला या रास्ते पर सब्जी बेचने वाला. सब माहिर होते है आंखे  सेकने की विद्या में.

कभी सोचा है की कितनी बेशर्मी से घूरते है आप लोग लड़कियों को? कभी सोचा है कि कितना घटिया होता है ये सब ? क्या कभी सोचा है कि ये भी एक तरह की कुंठा है? कभी सोचा है कि इस तरह की हरकतें बताती है कि अंदर से आप भी एक बलात्कारी है.

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