Artificial Intelligence: 22 जनवरी, 2026 को ब्लैक रौक के सीईओ और डब्लूईएफ के अंतरिम सहअध्यक्ष लैरी फिंक के साथ हुई बातचीत में टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क ने आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (एआई) को ले कर जो बातें कीं, वे मानव सभ्यता के भविष्य पर एकसाथ आशा और भय दोनों की परछाईं डालता है.
एलन मस्क ने कहा, ‘‘2027 तक एआई किसी भी एक इंसान से ज्यादा समझदार हो जाएगा और 2030-2031 तक यह पूरी मानव जाति से भी ज्यादा होशियार हो सकता है. एआई इतना आम और सस्ता हो जाएगा कि लगभग मुफ्त जैसा इस्तेमाल होगा. सवाल यह नहीं कि यह संभव है या नहीं, सवाल यह है कि जब ऐसा होगा, तब इंसान कहां खड़ा होगा?’’
एलन मस्क कहते हैं कि उन की कंपनी टेस्ला के औप्टिमस रोबोट पहले फैक्ट्री आदि में काम करेंगे, जहां उन को शुरू में कुछ आसान काम सौंपे जाएंगे. 2027 में इन से जटिल काम भी लिए जाने लगेंगे और इन का औद्योगिक इस्तेमाल शुरू होगा. अगर ये सुरक्षित और बेहतर काम करते पाए गए तो इन की बिक्री दुनियाभर में शुरू कर दी जाएगी.
मस्क का दावा है कि भविष्य में घरों, फैक्ट्रियों, दफ्तरों और खेतों में इंसानों से ज्यादा रोबोट होंगे. घर के भीतर ये बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों की देखभाल, घर के काम आदि सब संभाल लेंगे. काम की जगहों पर ये मनुष्य से ज्यादा काम करेंगे और इन को छुट्टी या तनख्वाह की जरूरत भी नहीं होगी. इस से वैश्विक अर्थव्यवस्था में अभूतपूर्व उछाल आएगा.
अब सोचिए कि आप के बच्चे का टिफिन बौक्स रोबोट तैयार करेंगे. सुबहसवेरे बच्चों को जगाना, उन को दूध पिलाना, उन्हें स्कूल के लिए तैयार करना, स्कूल ड्रौप करना, लौट कर दोपहर का खाना बनाना, घर साफ करना, कपड़े धोना, सुखाना, प्रैस कर के करीने से अलमारी में सजाना और घर में बुजुर्गों की देखभाल करना, उन को समय से खाना और दवा देना, उन के साथ वाक पर जाना या उन की जरूरत का सामान बाजार से ले आना जैसे अनेकानेक काम यदि रोबोट्स ने संभाल लिए तो घर की औरत तो बिलकुल फ्री हो जाएगी.
घर में उस की जरूरत भी खत्म हो जाएगी. अब इस की वह खुशी मनाए या रंज? अभी तक तो औरतें घर के कामों के चलते फुरसत के क्षण न मिलने का रोना रोती रहती हैं, मगर एक रोबोट जब उन के हाथों से सारे काम छीन लेगा तब वे क्या करेंगी?
खाली भी कितनी देर बैठा जा सकता है? घर के काम कर के और बच्चों व बुजुर्गों की सेवाटहल कर के जो भावनात्मक रिश्ता पैदा हुआ वह भी खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगा.
यह समस्या हर घर की महिला के सामने ही नहीं बल्कि घरों में काम करने वाले और भी कई लोगों के सामने भी खड़ी हो जाएगी.
घर में यदि रोबोट झाड़ू, पोंछा
व बरतन करने लगेंगे तो फिर मेड की क्या जरूरत? अगर रोबोट बागबानी करने लगें तो माली की क्या जरूरत? इन सब की तो नौकरी खत्म.
एलन मस्क कहते हैं कि अमेरिका में 2026 के अंत तक रोबोटैक्सी (ड्राइवर रहित टैक्सी) काफी फैल जाएंगी. यूरोप और चीन में जल्द ही, शायद अगले महीने, सुपरवाइज्ड फुल सेल्फड्राइविंग (एफएसडी) को मंजूरी मिल सकती है. ऐसे में ड्राइवरों का काम खत्म.
फैक्ट्रियों में अगर सारा काम रोबोट करने लगेंगे तो मजदूरों का क्या होगा? उन के घरों में तो फाके होंगे. दफ्तरों में अधिकारी के कमरे के आगे स्टूल पर रोबोट बैठे, अधिकारी से मिलने आए अतिथि को रोबोट चाय सर्व करे तो फिर चपरासी का क्या काम?
शाम को रोबोट को चार्जिंग पर लगा दो और दूसरे दिन वह काम के लिए फिर रेडी हो जाएगा. ऐसे में चपरासी को हर माह देने वाली तनख्वाह भी बचेगी. चपरासी बेरोजगार हो जाएगा और उस का परिवार भुखमरी से मर जाएगा.
एलन मस्क कहते हैं कि यह सब अब तक हो जाता मगर एआई को तेजी से विकसित करने में अभी जो रुकावट आ रही है, वह है बिजली की कमी. इस से निबटने का इंतजाम भी एलन मस्क कर रहे हैं. 2-3 साल में ही स्पेसबेस्ड सोलर यानी अंतरिक्ष, जहां हर समय सूरज की रोशनी और गरमी रहती है, में सोलर पैनल स्थापित कर के आने वाले 2-3 सालों में इस समस्या को समाप्त कर लिया जाएगा.
यानी, बहुत सारी फ्री बिजली की व्यवस्था हो जाएगी. एलन का कहना है कि इस तकनीक से बुजुर्ग आबादी की समस्याएं और ऊर्जा की कमी जैसी बड़ी समस्याएं हल हो जाएंगी.
टेस्ला और स्पेसएक्स के संस्थापक एलन मस्क एआई को तेजी से विकसित करने के पक्ष में इसलिए हैं क्योंकि उन का मानना है कि इस से बीमारियों का सटीक इलाज होने लगेगा, जलवायु संकट के समाधान प्राप्त होने लगेंगे, वैज्ञानिक खोजों की रफ्तार में तेजी आएगी.
अगर एआई सचमुच लगभग मुफ्त हो गया तो ज्ञान और सेवाओं की उपलब्धता सीमाओं से मुक्त हो सकती है. एक ग्रामीण छात्र, एक छोटे शहर का डाक्टर या एक सीमित संसाधनों वाला शोधकर्ता, सब के हाथ में समान ताकत होगी. यह तसवीर उत्साहित करती है, दूसरी तसवीर भयावह लेकिन कहीं ज्यादा डरावनी है. एआई जितना सक्षम होगा, उतना ही इंसानी श्रम अप्रासंगिक होता जाएगा. आज तक मशीनें इंसान की ताकत छीनती थीं, कल वे उस की बुद्धि छीन लेंगी. ड्राइवर, क्लर्क, अकाउंटैंट, पत्रकार, शिक्षक, प्रोग्रामर सब बेरोजगार हो जाएंगे. यह सूची बहुत लंबी हो सकती है.
एआई का अत्यधिक विकास सिर्फ नौकरी जाने की समस्या नहीं है बल्कि यह मानवीय उपयोगिता के संकट की शुरुआत हो सकती है. अगर मशीनें हर काम हम से बेहतर, तेज और सस्ते में कर सकती हैं तो फिर करोड़ों लोगों का सामाजिक मूल्य क्या होगा?
चिंता का विषय
इतिहास बताता है कि हर तकनीकी क्रांति ने नई नौकरियां पैदा कीं, लेकिन एआई के साथ फर्क यह है कि यह नई नौकरियां भी खुद ही कर सकता है. यह वह मोड़ है जहां ‘बेरोजगार’ शब्द छोटा पड़ जाता है. असली खतरा है बड़ी आबादी का संरचनात्मक रूप से अनावश्यक हो जाना. ऐसे समाज में असमानता चरम पर होगी. सत्ता कुछ टैक कंपनियों और डेटा मालिकों के हाथ में सिमट जाएगी. लोकतंत्र अर्थहीन हो सकता है, क्योंकि निर्णय मशीनें लेंगी. गहन चिंतन करने की जरूरत है कि क्या हम उस युग की ओर बढ़ रहे हैं जहां शीर्ष पर मशीनें बैठेंगी और हम उन की आज्ञाओं का पालन करने को विवश होंगे?
एआई के साथ दिक्कत यह हो सकती है कि उस की मिल्कीयत कुछ हाथों में रह सकती है. आप लोगों को खाने के लिए एआई का मुहताज होना पड़ेगा जो खेतों में काम कर के मुफ्त में अरबों को खाना देगा, पर वह खाना सब को बराबर देगा.
जब रोबोटों को मालूम होगा कि वे जरूरत से ज्यादा फालतू लोगों को पाल रहे हैं तो उन के मालिक लाखों नहीं, अरबों को उसी तरह मार सकते हैं जैसे एडोल्फ हिटलर ने जरमनी में द्वितीय विश्वयुद्ध में यहूदियों को गैस चैंबरों में मारा था.
रोबोटों को बनाने के लिए लोहे की जरूरत होगी पर एआई कंट्रोल्ड रोबोट मानवों से बेहतर खानों में काम कर सकेंगे और खान में छांटने का काम भी हो जाएगा. खान से लोहा और दूसरे मैटल एआई कंट्रोल्ड रोबोटों से उन फैक्ट्रियों में आ जाएंगी जहां रोबोटों का निर्माण हो रहा है.
रोबोटों के लिए सौफ्टवेयर बनाने का बहुत सा काम एआई लगे कंप्यूटर कर लेंगे, नए चैलेंज हल कर लेंगे.
दुनियाभर में मुट्ठीभर लोग ही जरूरत के रह जाएंगे जो असली वैज्ञानिकों को बंधक बना कर रख सकेंगे, उन से मनमाना काम करा सकेंगे.
यह भयावह दृश्य है जब बोलने की आजादी नहीं होगी, वोट देने की आजादी नहीं होगी, अब तक यह साइंस फिक्शन था, अब असल में होता दिख रहा है.





