दिनोंदिन मजबूत होता धर्म का जाल हर संप्रदाय में ऐसे आत्मघाती हमलावरों सरीखी फ़ौज तैयार कर रहा है जो अपनी कमर में बम लगाकर खुद को यह सोचकर उड़ा लेते हैं, कि जन्नत में हूरें इन्तेजार कर रही हैं. ठीक वैसे हम भी मदिरों की सीढ़ियों, नदियों के घाटों और ट्रेन की पटरियों पर आती-जाती रेलों से कुचलने से नहीं घबराते. बठिंडा में छठ पूजा के दौरान रेलवे ट्रैक पर जमा सैकड़ों लोगों को देखकर तो यही लग रहा था.

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