बात कुछकुछ ‘तीतर के दो आगे तीतर, तीतर के दो पीछे तीतर, आगे तीतर, पीछे तीतर, बोलो कितने तीतर...’ जैसे गाने की है, जो शोमैन राजकपूर की फिल्म ‘मेरा नाम जोकर’ में स्कूली बच्चों और उन की टीचर बनी सिमी ग्रेवाल पर फिल्माया गया था. मासूम बच्चे हैरानी से तीतरों की गिनती करते रहे थे लेकिन किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए थे. यही हाल देश के आम लोगों का है जो यह समझने में खुद को नाकाम पा रहे हैं कि आखिर सीबीआई में जो कुछ हुआ वह था क्या.

मोटेतौर पर लोगों को इतना ही समझ आया कि मामला घूस का है जिस में इस सर्वोच्च जांच एजेंसी के 2 आला अफसरों ने एकसाथ या अलगअलग करीब 5 करोड़ रुपए की घूस खाई और फिर दबदबे, रुतबे और रसूख की लड़ाई लड़ते एक दूसरे पर इतने और ऐसे इलजाम लगाए कि सीबीआई की साख एक झटके में खाक हो गई. किसी एक का नाम लेना बाकी के साथ ज्यादती होगी, इसलिए देश के सभी पुलिस थानों की बात एकसाथ करना बेहतर होगा, जहां दैनिक से ले कर साप्ताहिक और मासिक रूप से घूस का बंटवारा बड़ी ईमानदारी से होता है.

घूस के बंटवारे को ले कर पुलिस महकमे में कभी कोई विवाद नहीं होता, क्योंकि एक इसी मामले में पुलिस वाले ईमानदारी बरतते हैं और इकट्ठा किया गया पैसा पद के हिसाब से मिलबांट कर खा लेते हैं. इसी वजह के चलते पुलिस बदनाम है और आम लोगों में उस की इमेज कैसी है, यह बताने की जरूरत नहीं, लेकिन यही हाल सीबीआई का हो रहा है, तो चिंतित होना स्वाभाविक है, क्योंकि सवाल देश की आंतरिक व बाहरी सुरक्षा के साथसाथ महत्त्वपूर्ण घोटालोें और इरादतन या गैरइरादतन किए गए भ्रष्टाचारों से जुड़ा है.

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