मोबाइल हमारी जरूरत है या एक लत जो महामारी बनकर पिछले एक दशक से हमारे जीवन के हर पहलू में जानलेवा स्पेक्ट्रम की घुन लगा रहे हैं? यह सवाल ऐसा है जो पूरी दुनिया में पूछा जा रहा है. समस्या सब जानते हैं लेकिन समाधान किसी के पास नहीं है. हाल में फिल्म 2.0 में भी मोबाइल्स को मानवों के लिए महामारी सरीखा दिखाया गया.

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