अपने नौकरों की तुलना में पांच फीट और चंद सेंटीमीटर के राजा सिंह चौहान छोटी कद काठी के हैं. वो हमेशा तीन चार लोगों से घिरे रहते हैं. चौहान ग्वालियर में सरकारी पैसों से एक कौशल विकास केन्द्र चलाते हैं. आज वो भगवा कुर्ते पैजामे में इस केन्द्र के बाहर घास पर रखी एक मेज पर बैठे हैं. मैंने उनसे कोई डेढ़ घंटा बातचीत की और इस दौरान लोग लगातार मिलने आते रहे. मिलने वाले सभी स्थानीय मर्द थे. कुछ लोग उनसे राम राम करने आए थे और कुछ लोग सलाह मशवरे के लिए. एक आदमी उन्हें अपने जन्मदिन की पार्टी में बुलाने आया था. हर मुलाकात से पहले चौहान का निजी सचिव आने वाले की जाति का उल्लेख कर पहचान करा रहा था. वो कहता था, “ये शर्मा जी हैं”, पंडित”, “ये अपने तोमर का लड़का है”. हर आगंतुक पहले झुक कर चौहान के पैर छूता और फिर बोलने या बैठने के लिए चौहान की आज्ञा की प्रतीक्षा करता.

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