Sanatan Swabhiman Yatra: मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश की राजनीति में अप्रासंगिक हो चुके हैं. अपनी बची खुची प्रासंगकिता दिखाने उनके पास धरम करम ही बचा है, वह भी कर्मकांडी जिसका आम जनता के मुद्दों मसलन, दुखदर्द, समस्याओं और परेशानियों से कोई लेना देना नहीं. दो टूक कहा जाए तो दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश कांग्रेस की पीठ पर एक भार की तरह लदे हैं जिसे हाई कमान अभी जमीन पर फेक देना जरुरी नहीं समझ रहा.

हालाँकि इस फेक देने की शुरुआत की एक और बानगी 29 सितम्बर को देखने में आई थी. जब सीडब्ल्यूसी यानी कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मीटिंग में सोनिया गाँधी उनकी इस बात पर उखड़ गईं थीं कि साल 2024 में बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार को इंडिया गठबंधन से बाहर नहीं जाने देना चाहिए था. यह अहम मीटिंग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को घेरने की रणनीति बनाने के लिए बुलाई गई थी. इस मुद्दे पर चर्चा के बीच में दिग्विजय अचानक ही बिना फटे में ही अपनी टांग अडाते नीतिश कुमार को बीच में ले आए जो एक तरह से विषयांतर की ही कोशिश थी. जाहिर है इस असम्बद्ध बात से बहस या चर्चा का रुख ज्ञानेश कुमार से हट जाता.

बकौल दिग्विजय सिंह नीतिश कुमार अगर गठबंधन में रहते तो राजनैतिक परिस्थितियां कुछ और होतीं. इस पर सोनिया गांधी ने बेहद तल्ख़ लहजे में कहा अच्छा ही हुआ जो वे वक्त रहते चले गए. बस बात यहीं खत्म हो गई. कांग्रेस में सोनिया राहुल गाँधी के `तखलियाँ` कहने के बाद कुछ कहने सुनने की गुंजाइश नहीं रह जाती. लिहाजा अपना सा मुंह लेकर दिग्विजय सिंह वापस भोपाल लौट आए और अपनी प्रस्तावित सनातन स्वाभिमान यात्रा की तैयारियों में जुट गए. जिसकी टेग लाइन है कि `धर्म के नाम पर अधर्म के खिलाफ जनजागरण`.

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