श्वेता का कालेज में पहला साल था. ऐडमिशन के 2 महीने बाद ही फ्रैशर पार्टी होनी थी. सीनियर छात्रों ने श्वेता को फ्रैशर पार्टी की सारी जिम्मेदारी दे दी. श्वेता को तो ना कहने की आदत ही नहीं थी. ऐसे में वह हर काम के लिए हां कहती गई. फ्रैशर पार्टी की जिम्मेदारी निभाते श्वेता को इस बात का खयाल ही नहीं रहा कि इस काम के चक्कर में उस की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है. वह क्लास में पूरी अटैंडैंस भी नहीं दे पाई.

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