बीती 10 नवंबर को देशभर के प्रमुख अखबारों में राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड का एक छोटा सा विज्ञापन प्रकाशित हुआ था जिस में कुछ रिक्तियों के लिए आवेदनपत्र मंगाए गए हैं. यह बोर्ड भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत काम करता है.

इस विज्ञापन में 2 अहम पदों अपर निदेशक, चिकित्सा और निदेशक, गैरचिकित्सा का वेतनमान 1,23,100-2,15,800 था. पेबैंड 4 के बराबर इस पद के लिए ग्रेड पे 8,700 रुपए था. वेतन की इस सरकारी रामायण का सार इतना भर था कि डैपुटेशन यानी प्रतिनियुक्ति वाले इन पदों के लिए जो उम्मीदवार चुना जाएगा उसे लगभग 1 लाख 75 हजार रुपए पगार मिलेगी.

इतना आकर्षक और तगड़ा वेतन क्यों और काम कितना, इस बात का आकलन या तुलना किसी भी दूसरी सरकारी नौकरी से की जा सकती है कि सभी में बस मलाई ही मलाई है, जिस से जितना हो सके, चाट लो और पेटभरने के बाद चाहो तो लुढ़का भी दो.

क्या सरकार को इतना वेतन देना चाहिए, इस बात पर अलगअलग राय लोगों की हो सकती है, लेकिन इस बात पर शायद ही कोई इनकार में सिर हिलाएगा कि सरकारी नौकरी कोई भी हो, उस में पगार ज्यादा, सहूलियतें बेशुमार, मनमाफिक घूस, कम जिम्मेदारियों और उन से भी अहम बात कम काम होता है. इसलिए जहां भी सरकारी नौकरी दिखती है, लोग मधुमक्खियों की तरह टूट पड़ते हैं.

बात कहने की नहीं है, बल्कि सच भी है कि सरकारी नौकरी वाकई मुफ्त के लंगर की तरह होती है जिस में खाने का न तो कोई बिल आता है और न ही कोई रोकताटोकता है.

साथ ही मिलेगी ये खास सौगात

  • 5000 से ज्यादा फैमिली और रोमांस की कहानियां
  • 2000 से ज्यादा क्राइम स्टोरीज
  • 300 से ज्यादा ऑडियो स्टोरीज
  • 50 से ज्यादा नई कहानियां हर महीने
  • एक्सेस ऑफ ई-मैगजीन
  • हेल्थ और ब्यूटी से जुड़ी सभी लेटेस्ट अपडेट
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