Beauty Of Earth : 1980 के दशक में जब भारत मे टेलीविजन आया तब महाभारत और रामायण जैसे मिथकों का टेलीविजन के माध्यम से प्रसार हुआ. यही वो दौर था जब भारतीय समाज के अंदर वैज्ञानिक चेतना का सत्यानाश करने में टेलीविजन ने बड़ी भूमिका निभाई. लेकिन 1980 में अमेरिकन टेलीविजन पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम कोसमोस: ए पर्सनल वौयेज (ब्रह्माण्ड: एक निजी यात्रा) एक अद्भुत धारावाहिक था.
इस धारावाहिक के जरिये कार्ल सेगन यूनिवर्स को वैज्ञानिक नजरिये से समझाने का प्रयास कर रहे थे. आज के अमेरिका की तरक्की का सब से बड़ा कारण यही है की वहां साइंटिफिक टेम्पर के लिए सरकारों ने ईमानदारी से काम किया.
कार्ल सेगन की कोशिशों से ही 1984 में एसईटीआई जैसी संस्था बनी जिस का मकसद था दूसरे ग्रहों पर जीवन की तलाश.
वायेजर वन अंतरिक्ष यान को 5 सितंबर, 1977 को लॉन्च किया गया था. 14 फरवरी 1990 को वायेजर वन अंतरिक्षयान पृथ्वी से 6 अरब किमी दूरी पर था और उस ने धरती की ऐतिहासिक तस्वीर खींची. सुदूर आकाश में एक मामूली सा नीला बिंदु. इस ब्लू डोट को देख कर जो कार्ल सेगन ने कहा वो हमारे जगत की सबसे सुंदर व्याख्या बन गई. कार्ल सेगन की यह खूबसूरत लाइनें पढ़ कर आप भी जान जाएंगे कि पृथ्वी की इतनी सुंदर व्याख्या कार्ल सेगन के अलावा दूसरा कोई न कर पाया.
कार्ल सेगन कहते हैं-
“उस बिंदु को फिर दोबारा देखें वो हमारा घर है, वो हम हैं. इस पर वो सभी लोग हैं जिन्हें तुम प्यार करते हो, जानते हो, सुनते हो, हमारी ख़ुशी, हमारी वेदना, हमारे धर्म, मत, विचार, शिकार और शिकारी, नायक और खलनायक, सभ्यताओं को बनाने और बिगाड़ने वाले, राजा और किसान, प्यार में डूबे युवा, प्रत्येक माता-पिता, आविष्कारक और खोजी, नैतिकता के शिक्षक और भ्रष्ट नेता, हर एक सुपरस्टार और महान नेता, हर संत और पापी, सब कुछ जो हमारे इतिहास में हुआ इस मामूली से नीले बिंदु के भीतर ही हुआ जो सूर्य के प्रकाश में दिखने वाले धूल के कण के समान है हम सब तारे की धूल हैं (वी आरे आल स्टार स्टफ) और एक दिन इसी धूल में मिल जाएंगे.
इस अनंत ब्रह्मांड में पृथ्वी बहुत ही छोटी है. इसी छोटी सी धरती पर पैदा हुए उन शासकों के बारे में सोचिए जिन्होंने इस बिंदु के किसी हिस्से पर कब्ज़ा करने के लिए ख़ून की नदियां बहा दी थीं और एक मत ने दूसरे मत के साथ निर्दयता की सीमा पार दी थीं. वो बर्बर कबीले आये और देखें अपनी औकात की वे कितनी अज्ञानता से भरे थे ? एक-दूसरे को मारने की कैसी सनक भरी थी उनके दिमागों में ? कितनी घिनौनी थी उनकी नफरत ?
हमारा दिखावा, अहंकार और यह भ्रम कि इस ब्रह्मांड में हम खास जाती से हैं, इस बिंदु ने यह सब भ्रांतियां तोड़ दी हैं हमारा ग्रह इस अनंत अंधेरे ब्रह्मांड में एक अकेले कण के बराबर है इस अनन्त अंधकार में यूनिवर्स के इस कठोर विस्तार में दूर दूर तक कोई संकेत नहीं है कि कोई, हमारी मूर्खता और हमारी अज्ञानता से हमें बचाने कहीं और से आएगा ?
अभी तक यह पृथ्वी ही है जिसके बारे में हम जानते हैं कि यहां जीवन पनप रहा है इसके अलावा ऐसा कोई स्थान नहीं जहां हम रह सकें इसलिए इस पृथ्वी के बारे में हमारी चिंताएं सर्वोपरी होनी चाहिए फिलहाल तो यही सच है आप इसे पसंद करें या न करें लेकिन धरती ही एकमात्र जगह है जहां हमारा वजूद है.
एस्ट्रोनौमी हमारे घमंड को तोड़ देता है. धूल के कण बराबर की यह तस्वीर मानव-अहंकार को धूल में मिला देती है यह तस्वीर इंसान के रूप में हमारी ज़िम्मेदारी तय करती है कि हमें एक दूसरे से और भी ज्यादा कृतज्ञता और नम्रता के साथ व्यवहार करना चाहिए ताकि हम इस धरती को इंसानियत के लिए संजो कर रख सकें एक बार और इस तस्वीर को देखें यह नीला सा मामूली बिंदु सच मे हमारी यही धरती है जो हमारा एकमात्र घर है.” Beauty Of Earth :





