उनको यकीन था कि बाबा की एक झलक उन्हें उनके कष्टों से मुक्ति दे देगी. एक बूढ़ी औरत जो महीनों से बीमार थी, बुखार छूट ही नहीं रहा था, वह अपनी 16 साल की पोती के साथ इस यकीन से आयी थी बाबा की चरणरज मिलते ही वह भली चंगी हो जाएगी. एक विधवा का बच्चा बीमार था, वह अपने बच्चे के ठीक होने की उम्मीद लगाकर उसको लेकर बाबा के सत्संग में आयी थी. उस बूढ़े पर लाला का कर्ज था, वह इस आशा से आया था कि बाबा के आशीर्वाद से इस बार फसल अच्छी हो जाएगी तो कर्ज उतर जाएगा. कितनी ही जवान लड़कियां अच्छा घरवर पाने का आशीर्वाद बाबा से प्राप्त करना चाहती थीं. उनसे कहा गया था कि अगर बाबा की चरण धूलि मिल गयी तो हर अरमान पूरा हो जाएगा. कितने लड़के इस आशा में आये थे कि बाबा के आशीर्वाद से नौकरी लग जाएगी तो घर की बदहाली ख़त्म होगी.

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बाबा के सत्संग में हाथरस जिले से ही नहीं बल्कि कस्बों से, दूरदूर के गांवों से, अन्य जिलों से और हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी कोई दो से ढाई लाख लोग जमा हुए थे. भीड़ का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वाहनों की संख्या तीन किलोमीटर तक फैली हुई थी. हर श्रद्धालु के मन में कोई इच्छा थी और यकीन था कि वह इच्छा बाबा के आशीर्वाद से पूरी हो जाएगी. बाबा की दिव्य वाणी कानों में पड़ जाएगी तो सारे कष्ट दूर हो जाएंगे. देश की भोली, अनपढ़, धर्मभीरु जनता को यह यकीन बाबा ने दिलाया, बाबा के सैकड़ों सेवादारों ने दिलाया और धर्म का परचम बुलंद करके राजनीति की चाशनी चाटने वाली भारतीय जनता पार्टी ने दिलाया जो इन बाबाओं के प्रति लोगों की उत्सुकता जगाने का काम पिछले दस सालों से निरंतर कर रही है.

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