एक भारतीय के लिए यह कल्पना भी सिहरा देने वाली है कि एक दिन गंगायमुना जैसी नदियां नहीं रहेंगी. गंगा की विदाई की बात तो आम आदमी सोच नहीं पाता, लेकिन धीरेधीरे यह आशंका गहरा रही है. गंगायमुना दुनिया की उन नदियों में से हैं जिन के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है. साल 2014 में पर्यावरण संरक्षण से संबद्घ संस्था डब्लूडब्लूएफ ने इस खतरनाक तथ्य का खुलासा किया था. उस के मुताबिक गंगायमुना के अलावा सिंधु, नील और यांग्त्सी भी संकटग्रस्त हैं. डब्लूडब्लूएफ का कहना है कि निरंतर बढ़ते प्रदूषण, पानी के अत्यधिक दोहन, सहायक नदियों के सूखने, बड़े बांधों के निर्माण और वातावरण में परिवर्तन से इन बड़ी नदियों के लुप्त होने का संकट पैदा हो गया है.

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