Supreme Court: क्या रिश्ता टूटना ही बलात्कार है? क्या एक मर्द को रिश्ता खत्म करने का कोई हक नहीं है? और क्या एक औरत की सहमति को झूठ बोलकर लिया जाए तो वो सहमति मानी जाएगी? 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने इन्हीं सवालों पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. कोर्ट ने कहा है कि दो बालिगों के बीच सहमति से बना रिश्ता, सिर्फ इसलिए अपराध नहीं बन जाता क्योंकि वो रिश्ता बाद में टूट गया. अब सवाल ये है कि अगर शादी छिपाकर, पहली शादी कायम रहते हुए दूसरी शादी का भरोसा दिलाकर संबंध बनाए गए तो क्या वो सहमति थी या धोखा था?
इस मामले में कहानी थोड़ी उलझी हुई है इसीलिए इसे समझना जरूरी है. केरल के संतोष कुमार ने अपनी पहली शादी छुपाकर 1996 में एक लड़की से मैसूर के एक मंदिर में दूसरी शादी कर ली. 1996 से 2003 तक दोनों साथ रहे. यानी दोनों पति पत्नी की तरह 7 साल साथ रहे. फिर रिश्ता टूटा गया. औरत ने 2008 में घरेलू हिंसा का केस किया जो 2009 में खारिज हो गया. इसके बाद औरत ने रेप, धोखाधड़ी, विश्वासघात जैसी धाराओं में 2011 में FIR दर्ज कराई. यानी घटना के 8 साल बाद क्रिमिनल केस शुरू हुआ.
फिर ये केस 15 साल चला. 9 जनवरी 2015 को थलासेरी के एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज ने डिस्चार्ज याचिका खारिज की. फिर केरल हाईकोर्ट में 21 मई 2025 तक लड़ाई चली, वहां भी केस खारिज हुआ. आखिर में 30 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने संतोष कुमार को बरी कर दिया. कुल मिलाकर एक औरत 2008 से 2026 तक 18 साल तक अदालतों के चक्कर काटती रही और आखिर में फैसला मर्द के हक में आया.
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