China Population Crisis: चीन, जापान और यूरोप के कई देशों में घटती फर्टिलिटी रेट के कारण बुजुर्गों की आबादी बच्चों से अधिक हो गई है. चीन कामकाजी युवा आबादी के संकट से जूझ रहा है. भारत में भी फर्टिलिटी रेट गिरकर 1.9 हो गई है, जिससे भविष्य में कामकाजी आबादी घटने का संकट पैदा हो सकता है.
कभी बढ़ती आबादी को चीन और भारत जैसे देशों के विकास की सबसे बड़ी बाधा माना जाता था. ज्यादा आबादी को बेरोजगारी, गरीबी और संसाधनों पर बढ़ते दबाव के तौर पर देखा जाता था, लेकिन वक्त ने करवट ली. आज दुनिया के कई विकसित देश घटती आबादी और तेजी से बढ़ती बुजुर्ग आबादी की चुनौती से जूझ रहे हैं.
चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप के कई देशों में जन्मदर इतनी नीचे पहुंच गई है कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं.
किसी देश की आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए प्रजनन दर लगभग 2.1 होनी चाहिए. यानी एक महिला को औसतन 2.1 बच्चों को जन्म दे. इससे कम दर यदि लंबे समय तक बनी रहे तो आबादी में गिरावट आने लगती है. इसका असर तुरंत दिखाई नहीं देता, बल्कि कई वर्षों में सामने आता है.
चीन में वर्ष 1980 में बढ़ती आबादी पर नियंत्रण के लिए लागू की गई 'एक बच्चा नीति'' ने अब अपना असर दिखाना शुरू किया है. इस योजना का असर चीन की जनसंख्या संरचना पर साफ दिखाई दे रहा है.
आज चीन में 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की संख्या लगभग 22.3 करोड़ पहुंच गई है, जबकि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की आबादी करीब 21.3 करोड़ है. यानी बुजुर्गों की संख्या बच्चों से अधिक हो गई है. लगातार पांच वर्षों तक आबादी में गिरावट ने चीन की चिंता बढ़ा दी है.
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