मंदिर मूर्तियों से नहीं रोजगार से होगा विकास  जनता को लोकलुभावन वादों से भरमाने वाली तमाम सरकारें यदि करोड़ोअरबों रुपयों से मूर्तियां व स्मारक बनाने के बजाय देश में कारखाने और फैक्ट्रियां खोलतीं तो देश के बेरोजगार नौजवानों को रोजगार मिल जाता. आज देश की जनता को स्मारकों की नहीं, अच्छे स्कूल, कालेज और अस्पतालों की जरूरत है. पिछले 60 सालों में कुछ भी विकास न होने की बात कह कर भाजपा सरकार अपने 6 सालों के कार्यकाल में जिस विकास का ढोल पीट रही है उस का संबंध आदमी की मूलभूत आवश्यकताओं- बिजली, पानी, सड़क, रोटी, कपड़ा और मकान से कतई नहीं है.

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