दिल्ली में हुई हिंसा ने हम सबको हिला कर रख दिया. लोगों के सामने दिल्ली की खुशनुमां तस्वीरें अब बदरंग हो चुकी थी. जगह जगह हिंसा की तस्वीरे, रोने बिलखने की तस्वीरें, खाक हुए मकां और हिंसा के सुबूत. इसके अलावा और कुछ भी नहीं था. कल तो जो दिल्ली दिल वालों की कहलाती थी चंद घंटों में उसकी तस्वीर ही बदल गई. अब वो दिल्ली दिल वालों की नहीं बल्कि दंगाइयों को हो चुकी थी.

कौन थे वो लोग. कहां से आए वो लोग. कैसे होंगे वो लोग...इन सब सवालों का जवाब आज भी गायब है लेकिन एक बात तो सच है कि दिल्ली अब बदल गई है. इन सबके बावजूद कुछ ऐसी तस्वीरें भी हैं जो दिल को तसल्ली दे रही हैं.

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उत्तरी-पूर्वी दिल्ली में इस सप्ताह की शुरुआत में हुई हिंसा में उपद्रवियों ने खूब तबाही मचाई. हिंसा में 40 से अधिक मौत हो चुकी है, तो वहीं करोड़ों रुपये की संपत्ति का भी नुकसान हुआ है. इस दौरान कई जगहों पर एक समुदाय दूसरे समुदाय के खून का प्यासा दिखा, मगर साथ ही कुछ जगहों पर एक समुदाय ने अन्य समुदाय के लोगों की हिफाजत करते हुए गंगा-जमुनी तहजीब का नायाब उदाहरण भी पेश किया.

दिल्ली हिंसा के दौरान जहां कुछ स्थानों पर किसी समुदाय विशेष के लोगों को संभावित खतरे को देखते हुए सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसे लोग भी सामने आए, जो सीना तानकार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए डटे रहे. पूर्वोत्तर दिल्ली के बृजपुरी इलाके में बहुसंख्यकों ने अल्पसंख्यकों को हिंसक भीड़ से बचाकर मिसाल दी कि इंसानियत अभी भी जिंदा है.

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