कुछ महीने पहले तक बच्चों को मोबाइल फ़ोन पर गेम खेलने के लिए माँ बाप की डांट पड़ती थी. कभी-कभी तो पापा का मोबाइल फ़ोन चुपके से उठा कर यूट्यूब पर कार्टून देखने पर पिटाई भी हो जाती थी. अम्मा चिल्लाती थी -  हर वक़्त मोबाइल में आँखें गड़ाए रखता है, आँखें खराब हो जाएंगी. जब से कोरोना का कहर टूटा वही माता पिता अपने बच्चों के लिए लॉक डाउन में भी बाज़ार-बाजार घूम कर स्मार्ट फ़ोन खरीदते दिखे. अच्छी से अच्छी कंपनी का मोबाइल फोन, जिसमें पिक्चर भी क्लियर आये, स्क्रीन भी बड़ा हो और जिस पर नेटवर्क भी धांसू चले. टेबलेट और लैपटॉप की खरीदारी भी करनी पड़ी और ये सब सिर्फ इसलिए ताकि बच्चे ऑनलाइन क्लास अटेंड कर सकें.

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