प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्यूटर हैक की घटना रविवार को देशभर में चर्चा का विषय बनी हुई थी. आमतौर पर इसे एक छोटी घटना मान करके नजरअंदाज किया जाता है.प्रधानमंत्री कार्यालय से भी ट्विटर हैकिंग के बाद जो संदेश प्रसारित हुआ  इस प्रकार था-"खाते को तत्काल सुरक्षित कर लिया गया है ट्विटर हैक के समय साझा किए गए किसी भी ट्वीट को नजर अंदाज किया जाए"

कहने को तो यह बहुत ही सामान्य बात है कि टि्वटर हैंडल हैकिंग के समय किए गए उस समय के ट्वीट को  नजरअंदाज कर दिया जाए मगर हम आपको यह बताना चाहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के टि्वटर हैंडल को सिर्फ 3 मिनट के लिए हैक करके बिटकॉइन के संदर्भ में जो संदेश प्रसारित किया गया और बाद में बड़े ही शातिराना अंदाज में डिलीट कर दिया गया उसके परिणाम स्वरूप 50 अरब रुपए का खेल हो गया.

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अब यह समझने के लिए और दुनिया भर की जांच एजेंसियों और सरकार के लिए विचारणीय विषय है कि भारत जैसे राष्ट्र के संवैधानिक पद पर बैठे हुए प्रधानमंत्री के ट्यूटर हैंडल हैक के बाद जो कुछ हुआ है वह बड़ी ही गंभीर स्थिति का सूचक है. यह भी आज जानाना समझना और उस‌ कथित हैकर के गिरेबां पर अंतरराष्ट्रीय कानून बना कर हाथ डालना आवश्यक है.सवाल यह है कि आखिर हमारे देश के प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल को हैक करने के बाद लाभ किसका हुआ? सीधी सी बात है जिसने लाभ कमाया है उसी ने प्रधानमंत्री के ट्विटर को हैक कराने मैं दिलचस्पी ली हो सकती है. हालांकि ऐसा कोई कानून नहीं की  हैकर्स की गर्दन नापी जा सके.

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