एक पुरानी कहावत है ‘9 की लकड़ी 90 खर्च‘ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार पर यह कहावत पूरी तरह से फिट बैठती है. अयोध्या में ‘राम की पैडी’ पर दीपोत्सव मनाने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार ने 5 लाख 50 हजार से अधिक के मिट्टी के दीये जलाने का लक्ष्य रखा था. इस लक्ष्य को पूरा करने के लिये सरकार ने ‘दीपोत्सव’ के बजट को बढाकर 1.33 करोड़ का कर दिया था. ऐसे में सरकार ही नहीं दूसरे तमाम संस्थान भी दीपोत्सव को सफल बनाने में कमर कस कर खड़े हो गये. जिसके फलस्वरूप 6 लाख से अधिक के दीये रोशन हो गये.

पिछले साल दीपोत्सव के बाद अगली सुबह दीयें पूरी अयोध्या में बिखरे पड़े थे. इस बार सरकार और अयोध्या नगर निगम ने कार्यक्रम खत्म होने के बाद ही कार्यक्रम स्थल से दीयों को समेटना शुरू कर दिया. इन दीयों को आधी रात सरयू नदी मे प्रवाहित कर दिया गया.

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‘दीपोत्सव’ को सफल बनाने के लिये उत्तर प्रदेश सरकार के बड़े अफसर कई दिनों से तैयारी कर रहे थे. 3 दिन के दीपोत्सव के समापन वाले दिन दीये जगमगाये गये थे. दीवाली के दिन शाम को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, राज्यपाल आनंदी बेन पटेल और मुख्य अतिथि के रूप मे फिजी गणराज्य की डिप्टी स्पीकर वीना भटनागर के साथ उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और केशव मौर्य भी मौजूद थे.

दीपोत्सव को ऐतिहासिक बनाने के लिये गिनीज बुक और वर्ल्ड रिकार्ड के लोगों ने उसे सबसे अधिक दीये जलाने का रिकार्ड दर्ज किया. राम और सीता को हेलीकाप्टर से सरयू के तट पर उतारा गया और तब मुख्यमंत्री ने उनकी आरती उतारी. पिछली बार सीता बनी मौडल के फोटो वायरल हो गये थे इस बार सीता बनी मौडल को लोगों से दूर रखा गया.

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